हम किसी भी व्यक्ति का नाम विभीषण क्यों नहीं रखते?
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इतिहासकार मैथ्यू व्हाइट ने इतिहास की 100 सबसे भयावह नृशंस घटनाओ पे एक पुस्तक (The Great Big Book of Horrible Things) लिखी थी जो वर्ष 2011 में प्रकाशित हुई थी. लेखक के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध कुल 6.60 करोड़ लोगो की हत्या के कारण सम्पूर्ण इतिहास में सबसे क्रूर घटना है.
दूसरे नंबर पे चंगेज खान और चीन के माओ है जिन्होंने 4 करोड़ लोगो की नृशंस हत्या की. चंगेज ने उस समय की कुल जनसँख्या का 11.1 प्रतिशत को अकाल मृत्यु दे दी.
नवे नंबर पे तैमूर है जिसने 1.7 करोड़ लोगो को मौत के घात उतार दिया, जो विश्व की कुल जनसँख्या का 4.7 प्रतिशत था.
23 वे नंबर पे "दयालु और सहिंष्णु फ़कीर" औरंगजेब बैठे है जिसने 46 लाख लोगो को मार डाला.
अंग्रेजो के शासन में 2.70 करोड़ भारतीय भुखमरी के शिकार हो गए, जिसने इस घटना को चौथा स्थान दिया.
पाकिस्तानियो ने 15 लाख बांग्लादेशियो को मार के 40 पायदान पे सम्मान पाया.
अरब देशो में गुलामो के व्यापार में कुल 1.85 करोड़ लोगो को मारा गया जिसने इस घटना को 8 वी सीढ़ी पे चढ़ा दिया.
**पूरी लिस्ट में एक भी सनातनी धर्म का अनुनायी नहीं है, एक भी सनातनी राजा नहीं है.**
सोचने की बात है कि हम किसी भी व्यक्ति का नाम विभीषण भी नहीं रखते जिसने भगवान राम की मदद की थी. कैकेयी, मंथरा, कंस, दुर्योधन, रावण इत्यादि तो दूर की बात है.
लेकिन आपको ओसामा, तैमूर, औरंगजेब, चंगेज नाम बहुत मिल जाएंगे.
क्या बात है कि कुछ लोगो को इतिहास के क्रूरतम और वहशी हत्यारों से प्रेरणा मिलती है?
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