गिलगित_बाल्टिस्तान

#गिलगित_बाल्टिस्तान

वो सारा का सारा है पूरा कश्मीर हमारा हैः
मैं अपने देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह जी की उस भाषण का खुले हृदय से सम्मान करता हूं
" जब हम जम्मू कश्मीर की बात करते हैं, तो उसमें pok भी आता है अक्साई चीन भी आता है," मर जाएंगे इसके लिए।

यहीं इस प्रकरण के इर्दगिर्द घूमती मेरी आज की पोस्ट !

भारत के आज की युवा पीढ़ी पूरा नहीं जानती गिलगित बाल्टिस्तान यह कश्मीर का ही भूभाग है
यह जानकारी आज के प्रत्येक व्यक्ति को होनी चाहिए १९४७ में जब कश्मीर पर पाकिस्तान और पठानों ने हमला किया तो कुछ अधिकार कश्मीर का कब्ज़ा कर लिया,उसी समय पाक ने स्वायत्तसाशित राज्य बाल्टिस्तान और गिलगित पर भी हमला किया और उस पर जोर जुल्म के बल पर कब्ज़ा किया।

आज जो आवाज बलूचिस्तान से आजादी की फुट कर निकली है वह उस दिन अधिक तीव्र हुई थी जब भारत के प्रधान मंत्री ने लाल किले से बलूचिस्तान को साथ देने और सहायता का वादा किया ।

जैसा कोंग्रेस के अंडोले बहुत अच्छी तरह से जानते है भारत का वर्तमान प्रधान सेवक वादे का बड़ा पक्का है।

क्यों बे पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले चिलगोजो अाई कुछ बात समझ में, तुमको ही कह रहा हूं कोंग्रेस के चमचो।

मूल बिंदु यह है कि यह क्षेत्र भारत के लिए महत्वपूर्ण क्यों हैं
क्योंकि यह हमारा ही अभिन्न अंग है इसलिए इसकी पूर्ण चर्चा के पहले कुछ निगाहें करम गिलगित बलूचिस्तान पर।

इस राज्य का कुल क्षेत्रफल ७२९७१ वर्ग किलोमीटर है,
इसकी कुल आबादी २५०००० है।
इसकी सीमाएं पश्चिम में खैबर पख़्तून से, उत्तर में अफगानिस्तान से, उत्तर पूर्व में चीन के प्रांत शिनिज्यांग से, दक्षिण में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से, और दक्षिण पूर्व में जम्मू कश्मीर से।
यह गिलगित बलूचिस्तान पाक कश्मीर के भीतर का एक स्वायात्तशाशित क्षेत्र है,
इसको पूर्व में शुमाली नाम से जाना जाता था।

पाक ने हाल ही में २०१८ के नाम से नया कानून बनाया है जिससे पाक इस पर पूर्ण नियंत्रण कर सके।

यहां के लोगों पर हो रहे अत्याचारों की एक बानगी आपने पाक पीएम इमरान के अमेरिका दौर पर देखा होगा, जिसमें इस चूतिये को भीड़ देख कर यह गुमान आया की ये हमारे समर्थक है किन्तु जैसे ही इस कौए ने काएं काएँ शुरू की उसके फौरन बाद है पाकिस्तान मुर्दाबाद, बलूचिस्तान पर अत्याचार बन्द करो इमरान वापस जाओ आदि नारे लगे।
अब इनकी असलियत सभी के सामने थी ।

मेरे लिए वो हर क्षेत्र अहमियत रखता है जो कालांतर में हमारा हिस्सा था।
बलूचिस्तान और गिलगित पर्वतारोहियों के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि इसकी पर्वत मालाएं हिमालय को छूती हैं।

अब कोंग्रेस के झोला छाप गुलाम नबी आजाद को कोई बताओ बेटा कश्मीर पर कश्मीरियों का नहीं भारत का अधिकार था, है और अब उसपर मोदी जी ने ३७० हटाकर मोहर लगा दी है,
तुमसे जो उखड़ता हो उखाड़ लो।

भारत का वो स्वर्ग, जो पाकिस्तान के कब्जे में है चूंकि ये विवादित इलाका है, लिहाजा अब तक इसकी स्थिति स्वायत्तशासी इलाके की थी लेकिन अब पाकिस्तान इसे अपने देश का पांचवां प्नांत बनाने के लिए साजिश रचने में लगा हुआ है।

गिलगित-बाल्टिस्तान अब तक स्वायत्तशाली इलाका है। माना जाता है कि पाकिस्तान ने इस इलाके पर अवैध तौर कब्जा किया हुआ है. कश्मीर का हिस्सा होने के काऱण ये भारत का अंग है, लेकिन न केवल पाकिस्तान इस इलाके को दबाकर बैठा है बल्कि वो अब इसे अपना पांचवां प्रांत बनाना चाहता है, इसको लेकिन उसने संसद में एक नया कानून पास कराया है (जिसका मैंने जिक्र किया था), भारत ने इसका विरोध किया है।
ये जायज भी है, भारत हमेशा से इस इलाके को कश्मीर का अभिन्न हिस्सा मानते हुए अपना मानता रहा है।
भारत का कहना है कि पाकिस्तान जबरन कब्जे वाले इस क्षेत्र के किसी भी हिस्से के दर्जे में बदलाव नहीं कर सकता. उसके पास इसके लिए कोई कानूनी आधार नहीं है।
भारत ने पाकिस्तान के तथाकथित गिलगित - बाल्टिस्तान आदेश, २०१८ के खिलाफ सख्त विरोध जताया है।

क्या है भारत और भारत की जनता का पक्ष

१९४७ में हुए विलय के आधार पर पूरा जम्मू कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा है।
‘गिलगित - बाल्टिस्तान’ इलाका उसी राज्य में शामिल है. पाकिस्तान को इस इलाके को खाली करना ही होगा।

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