"३ तलाक बिल""

"३ तलाक बिल"" अक्सर समसामयिक विषय पर लिखा जाता है आप साहेबानों द्वारा!
घटना होने के बाद उस पर लिखने की इतनी जल्दी रहती है कि कभी कभी तो घटना घटने से पहले ही लिख दिया जाता है,ताकि कोई और इसके ऊपर न लिख दे!कई घटनाएं तो ऐसी भी हुई हैं कि हुआ कुछ और तथा लिखा गया कुछ और!!

खैर में साहेबानों की आलोचना नहीं करना चाह रहा हूँ!हिंदूवादी हूँ,सो मैं तो हिंदुत्व के प्रति भावनात्मक रवैया जारी रखते हुए....हिन्दू समाज को इस बिल से होने वाले नुकसान.... के गुण दोष की व्याख्या करना चाहूंगा!मैं चाह रहा हूँ कि ३ तलाक बिल पारित होने के बाद....इससे उपजने वाले और अधिक लवजेहाद के केसों पर.....आप सभी बुद्धिजीवि.... सोशल मीडिया के बजाय.....प्रत्येक हिन्दू मोहल्लों में घर घर जाकर......अपने घर खानदान की इज़्ज़त को लवजेहाद के चंगुल में फंसने से बचाने के लिये....जन जागृति का काम करने की अपील लोगों से करें!

साहेबानों,आप में प्रतिभा है लोगों पर जादू करने वाले शब्द उगलने की!आपके बोलने लिखने में विस्मयकारी आकर्षण है!हज़ारों लाखों लोग आपमे से प्रत्येक व्यक्ति के फॉलोवर हैं!आप अपनी आकर्षण से परिपूर्ण भाव भंगिमाओं से लोगों को बेहतर ढंग से समझा सकते हो कि वो घर से बाहर जाने वाली बहन बेटियों को लवजेहाद के खतरों से सचेत करें,उनके गुण दोष बताएं!
यकीन मानिए इतना करने भर से लवजेहाद में 50% की कमी आएगी!हफ्ते के प्रत्येक रविवार को यह काम मोहल्ले मोहल्ले जनसभा करके निष्पादित किया जा सकता है!बंधुओं आज मेरी बोली भाषा उत्तेजित नहीं है।इनमें से कोई न कोई मेरी भी बहन बेटी भी होगी,जो सम्भवतः इतना करने से ""प्रेमदिवानी मीरा का भूत""अपने दिमाग से उतार दे!
सेक्युलर हिंदुओं की क्लास लगाने का वक़्त आ गया है बन्धुओं!इन सेक्युलरों ने अपनी बच्चियों को बेतहाशा छूट दे रखी है!
अभी 20 दिन पहले मेरे मोहल्ले से एक वाल्मीकि लड़की एक कुकुरपुत्र के साथ चली गयी थी!चूंकि अपने इलाके में मैं और मेरे साथी लगातार लवजेहाद के खिलाफ आपही की तरह घंटा बजाता रहता हूँ सो 10 घंटे के भीतर ही एक मदरसे के मौलवी का फोन लड़की के घरवालों पर पहुंच गया था इस विनय के साथ कि आप अपनी बेटी को आकर ले जाओ!क्या कभी सुना है ऐसा प्रकरण की भागी हुई युवती वापस लौटी हो?बताया गया कि भागने के 2 घंटे के भीतर ही लड़की ने शोरशराबा करना शुरू कर दिया और उन चीजों को याद करके उसकी स्मृति लौट आयी जो चेतावनियां उसने हम लोगों से सुन रखीं थीं!
आपमे से कई लोग मेरी कहानी पर संदेह कर सकते हैं लेकिन मुझे परवाह नहीं क्योंकि किसी विवाद को जन्म देने के लिए मैं लड़कीवालों की पहचान और फोन नंबर यहां प्रसारित नहीं कर सकता न!
प्रार्थना है कि दिन भर घंटा बजाते रहने से बेहतर है समाज के सच्चे हितैषी बनकर अपने अपने इलाकों में जनजागरण करें!
किशोर वाल्मीकि की मार्मिक अपील पर ध्यान दीजिये बंधुओं!
अपने ज्ञानी होने का घमंड तेल लगाके अगले जन्म के लिए सुरक्षित रखें,वो अगले जन्म में काम आएगा!वरना फ़ेसबुक पर खाता खोले कल्लू और बब्बन ही आपको पहचानेंगे,आपके मरने के बाद सीड़ी को कंधा देने वाले जैन साब और उनके बच्चे नहीं!!

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