प्रियंका वाड्रा उर्फ जिज्जी की नौटंकी खत्म हुई😊
कांग्रेसी फौज भले ही जोश में होश खोकर बावली और बेताब हुई जा रही थी लेकिन जिज्जी जान रही थी कि उसका पाला योगी से पड़ा है। इसीलिए वो जिज्जी जो कल से सरकार को धमका रही थी धौंसिया रही थी कि जबतक एक एक पीड़ित आदिवासी परिवार से मिल नहीं लूंगी तब तक यहीं धरने पर बैठी रहूंगी। चाहे जितने दिन बैठना पड़े। 😊
जिज्जी की इस धमकी धौंस के बाद लुटियनिया मीडिया जिज्जी पर निहाल और न्योछावर हो गई थी जिज्जी की तारीफ में लट्टू की तरह नाचने लगी थी। लेकिन बिना एयरकंडीशंड कमरे वाले गेस्ट हाउस की जला देनेवाली गर्मी और भयंकर उमस के साथ ही साथ आधे इंच लम्बे मोटे तगड़े मच्छरों के भयंकर आक्रमण के बीच जैसे तैसे जागते हुए गुजरी रात का सच झेल चुकी जिज्जी भलीभांति यह समझ गयी थी कि वो अगर कांग्रेसी चमचों और पालतू लुटियनिया मीडिया की सरासर झूठी वाहवाही के जाल में फंसी तो एक हफ्ते बाद आईने में अपनी स्वयं की शक्ल नहीं पहचान पाएगी। अधिकारियों ने भी जिज्जी को बहुत स्पष्ट बता दिया था कि इस गेस्ट हाउस में चाहे जितने दिन धरना दो लेकिन बाबा (CM योगी) टस से मस नहीं होनेवाले, इसलिए सोनभद्र तो तुम नहीं जा पाओगी। यह सुनते ही जिज्जी का तन मन कांप गया कि बिना एयरकंडीशनर के इस भयंकर उमस और गर्मी में मच्छरों की फौज के साथ अभी कई रातें गुजारनी पड़ेंगी। अतः एक बुजुर्ग कांग्रेसी की प्रार्थना पर अधिकारियों ने सोनभद्र के 2 लोगों से जिज्जी की मुलाकात कराई। जिज्जी ने भाषण ठेला और तत्काल अपना धरना खत्म करने का ऐलान कर के दिल्ली की फ्लाइट पकड़ने के लिए बनारस रवाना हो गई।
जिज्जी के इस दांव से कांग्रेसी चमचों की वो फौज हक्का बक्का रह गयी जो जिज्जी के उस ऐलान के समर्थन में कल से नाच कूद रही थी कि... सोनभद्र के उस गांव के एक एक आदमी से मिले बिना अनिश्चितकाल तक यहीं धरने पर बैठी रहूंगी
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