कट्टर हिन्दू भक्त बौरा गए है! मोदी जी के बारे में एक कट्टर हिन्दू भक्त क्या सोच रहा है, क्या लिख रहा है : 📌 मोदी जी तुष्टिकरण की राह पर चल पड़े है! 📌 मोदी जी गांधी जी बनने का प्रयास कर रहे है! 📌मोदी जी को नोबल पुरस्कार की लालसा है!
कट्टर हिन्दू भक्त बौरा गए है! मोदी जी के बारे में एक कट्टर हिन्दू भक्त क्या सोच रहा है, क्या लिख रहा है :
📌 मोदी जी तुष्टिकरण की राह पर चल पड़े है!
📌 मोदी जी गांधी जी बनने का प्रयास कर रहे है!
📌 मोदी जी को नोबल पुरस्कार की लालसा है!
उपरोक्त तीनों कथन लिखने वाले भक्तों की बुद्धि पर मुझे तरस आता है! चूंकि ये भक्तगण वामपंथी मीडिया के एजेंडे में फस कर वो देख रहे है जो वास्तव में है ही नहीं!
🙌 जिस मोदी ने तुष्टिकरण के खिलाफ बोलने के लिए आपके मुंह में जबान दी, जिसने तुष्टिकरण के खिलाफ पिछले 20 साल से लड़ाई लड़ी, वो मोदी आज तुष्टिकरण कर रहे है!
🙌 लगता है भक्तगण मोदी को अपना आदर्श नहीं मानते, मुझे आज भी याद है जब लंदन के एक कार्यक्रम "भारत की बात सबके साथ" में मोदी जी से प्रशून जोशी जी ने पूछा था "आप क्या चाहते है इतिहास आपको कैसे याद करे" तब मोदी जी ने कहा था, "मै इतिहास में नाम अमर करने के लिए ना पैदा हुआ हूं ना मेरा वो मकसद है, मकसद है तो सिर्फ मेरा देश अजर अमर रहे, लोग याद करें तो मेरे देश को याद करें, मोदी क्या है जी मोदी तो एक छोटी सी चीज है" जिस मोदी के विचार ऐसे हो ये भक्तगण उसको दूसरा गांधी बना रहे है!
🙌 सबसे ज्यादा दयनीय तो यह है कि भक्तों को लगता है मोदी को नोबल पुरस्कार की लालसा है! लगता है इन्होंने मोदी के व्यक्तिगत जीवन के बारे में कुछ पढ़ा नहीं, मोदी ने जितना त्याग किया है उतना त्याग शायद ही किसी अन्य नेता ने किया होगा, जो व्यक्ति सिओल पीस प्राइज मिलने पर उसकी धनराशि गंगा सफाई अभियान "नमामि गंगे" के लिए दान कर देता है, जो तमाम देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त करने के बाद कहता है कि "यह मेरा नहीं सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है", उसको नोबल प्राइज की लालसा है! वाह भक्तों वाह!
कैसे भक्त हो आप ?? शर्म आती है या वो भी बेच खाए हो आप सब ? मुझे आज भी याद है जब वो व्यक्ति यह कहते हुए रो पड़ा था "मैंने घर, परिवार सब कुछ आपके लिए छोड़ा है, सवा सौ करोड़ देशवासियों का कल्याण इसीलिए जिंदगी खपा रहा हूं"
मोदी जी की जगह यदि कोई और नेता होता तो एक पल को मै मान लेता कि वो मार्ग से भटक गए है! लेकिन जिस मोदी ने हम मुट्ठी भर हिन्दुओं को, सवा सौ करोड़ देशवासियों को सही मार्ग दिखाया है आज उसपर ही मार्ग से भटकने का आरोप लगा रहे है आप ?
क्या चाहते है आप ? एक 68 वर्षीय व्यक्ति कितना कुछ कर रहा है, किसके लिए ? बदले में वो क्या ले रहा है कभी सोचा है ? लगातार काम कर रहा है बदले में वो अभी तक तो विपक्ष की गालियां खा ही रहा था अब भक्तों के ताने भी सहन कर रहा है और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दिन रात कठोर परिश्रम कर रहा है!
क्या है लक्ष्य उसका ? नोबल प्राइज ?? दूसरा गांधी बनना ?? या भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना ??
मोदी द्वारा देश के लिए पिछले 5 वर्षों में इतना सब कुछ करने के बाद भी अगर खुद को समर्थक या भक्त कहने वाले आप आलोचना के नाम पर मोदी के प्रति स्तरहीन टिप्पणीयां करते है तो वाकई मेरी नज़रों में आपसे ज्यादा सम्मानित वो विपक्षी है जो कम से कम अपने नेतृत्व के प्रति स्तरहीन टिप्पणीयां नहीं करता है!
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