कई बार उद्धरण दे चुका हूँ। सपा सरकार की घटना है। बाँगर माऊँ में पुजारियों की हत्या हुई थी, हत्यारे समुदाय विशेष के थे। अखिलेश सरकार में सख़्त आदेश थे ऐसे केस में कार्यवाही दूर मुक़दमा तक ना लिखा जाए। ज़बरदस्त बवाल हुआ, बाज़ार बंदी, तनाव, धरना प्रदर्शन तक हुआ फिर भी मुक़दमा ना लिखा गया। भाजपा ने मुहिम हाथ में ली। तब जाकर एक ठो मुक़दमा लिखा गया था। कार्यवाही तो ख़ैर भूल ही जाइए।
मेरठ में ख़बर आई कि हिन्दू पलायन कर रहे हैं, मुस्लिम उन्हें परेशान कर रहे हैं तो वह अपना घर मुस्लिम को बेंच भाग रहे हैं। आनन फ़ानन में लक्ष्मी कांत बाजपेई जी ने मोर्चा सम्भाल लिया। दूसरी ओर से सांसद राजेंद्र अग्रवाल जी, भाजपा के सारे विधायक पार्षद सब पहुँच गए। अधिकारियों ने बचाव की कोशिस की तो लक्ष्मीकान्त जी ने अधिकारियों को टाइट किया। मुख्य मंत्री योगी जी ने ख़ुद बोला हमारे रहते कौन पलायन करेगा (छिपा मेसेज भी समझदार समझते हैं)। IG, SSP सबका तबादला हो गया। सारे अधिकारियों के हाथ पैंर फूले पड़े हैं। ज़िलाधिकारी से लेकर अन्य सभी प्रशशनिक अधिकारी उसी मुहल्ले में डटे पड़े हैं। कालोनी में आनन फ़ानन में CCTV आदि लगाया गया। सारे पुराने मुक़दमे खोले गए। थाने पर विशेष कैम्प लगाए गए। बीते दिनों में की गई सारी रेजिस्ट्री भी रद्द हो रही हैं।
ऐसे किसी भी प्रकरण में क़ानूनी तौर पर शायद अधिकतम इतना ही किया जा सकता है।
दूसरा पहलू यह कि कोई अपना घर स्वेच्छा से मुस्लिम को बेंच कर जाए तो सरकार हाथ तो ना रोक लेगी। किसी की बेटी किसी दूसरे धर्म वाले के साथ प्यार की पेंगे लगाए तो जोगी जी कट्टा लेकर थोड़े ही समझाने आएँगे। अग़ल बग़ल थोड़ी दमदारी बना कर रखना - यह सब कार्य तो ख़ुद करने चाहिए। सरकार आपको क़ानून व्यवस्था तो दे सकती है, पर घर के अंदर कैसे रहना है, क्या फ़ैसले लेने हैं वह तो स्वयं ही करना पड़ेगा।
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