हिन्दुओं की मूर्खता और हाजी अली मुंबई वाले की सच्चाई
तैमूर लंगड़ा जब दिल्ली के करीब पहुंचा उसके पास एक लाख से ज्यादा हिन्दू गुलाम थे जिनमें औरतें, बच्चे भी थे इन गुलामों का नियंत्रण था एक उज्बेक अमीर शाहरुख मिर्ज़ा के हाथ इस शाहरुख मिर्ज़ा का बेहद करीबी मौलवी और उज्बेक व्यापारी था शाह अली खानजादा....!
तैमूर परेशान था का दिल्ली सल्तनत ये युद्ध के समय इन गुलामों का क्या किया जाए... ऐसे में शाह अली ने अपनी राय दी "जो गुलाम मुसलमान हैँ उन्ह रिहा कर दिया जाए काफिरों को क़त्ल कर दिया जाए.... काफिरों को नहीं छोड़ा जा सकता"
एक लाख हिन्दू तलवार के घाट उतार दिये गए उनके सरों का बड़ा ढेर दिल्ली के बाहर बनाया गया..... और फिर दिल्ली को फतह कर हज़ारों की तादाद में हिन्दू कत्ल किये गए.....!
हिंदुस्तान में भारी कत्लोगारत मचा और बड़ी लूट कर तैमूर 1398ई मैं वापस लौटा मगर ज्यादा दिन राज नहीं कर सका और 1405ई में मर गया उसके बाद मचे उत्तराधिकार के गदर में मौलवी शाह अली तैमूर के खजाने से पैसा चुरा भाग निकला..... और हिंदुस्तान के सिंध इलाके में आ व्यापारी बन गया..... और अपने व्यापार के लिए गुजरात और तब की दक्कन की सल्तनतों तक जाने लगा उसने अपनी छवि एक धार्मिक और नर्मदिल इंसान की बना ली...
उसे लोग हाजी शाह अली बुखारी के नाम से जानने लगे
उत्तराधिकार की जंग फ़तेह कर गद्दी पर बैठा #शाह_रुख_मिर्ज़ा और उसे अपने चोर और गद्दार साथी की याद आयी उसने उसकी तलाश का हुक्म दिया तो शाह अली फकीर का भेष बना अरब भाग निकला...... मगर वहां पहचान लिया गया और तैमूर के कत्लोगारत को देख चुका अरब किसी हालात में दोबारा उज़्बेकों को अपने यहां नहीं देखना चाहता था सो उन्होंने शाह अली को जिंदा एक संदूक में बंद कर समुद्र में फैक दिया.....!
ये संदूक इत्तेफ़ाक़ से बहता हुआ आज की मुम्बई के पास के एक टापू पर आलगा जिसे कुछ मछुआरों ने खोला तो उसमें फकीर के लिबास में एक लाश थी इस लाश को कुछ मछुआरों ने पहचान लिया और उसे उसी टापू पर दफ़न कर दिया गया.... !
धीरे धीरे संदूक में मिली फ़क़ीर की लाश की चर्चा फैलने लगी और तमाम कहानियां भी प्रचलित हो गयीं और शाह अली, पीर हाजी शाह अली बुखारी बन गया...... आगे के कहानी वही है जो हिंदुओं के चूतियापे को दिखाती है....
आज इस शाहरुख मिर्ज़ा के क्रूर हत्यारे साथी को #पीर_हाजी_अली_शाह_बुखारी कह इसकी क़ब्र पर सैकड़ों हिन्दू नाक रगड़ने जाते हैं और उस टापू को जहां बक्सा दफ़नाया गया था हाजी अली दरगाह कहा जाता है.....!
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