रामपुर की मोहम्मद अली जौहर युनिवर्सिटी आजकल खासा चर्चा में है।

रामपुर की मोहम्मद अली जौहर युनिवर्सिटी आजकल खासा चर्चा में है। होनी भी चाहिए क्योंकि अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में मुलायम सिंह यादव जी ने MY समीकरण को साधने के लिए इसका 2004 में प्राईवेट युनिवर्सिटी का बिल पास करवाया 2006 में शिलान्यास किया था और दूसरे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी ने छह साल बाद 2012 में इसका उद्घाटन किया था।
वैसे चर्चा का विषय ये होना चाहिए था कि 2006 से 2014 तक उत्तर प्रदेश में दो राज्यपाल रहे टी वी राजेश्वर और बी एल जोशी दोनों ने इस युनिवर्सिटी के आजम खान के ताउम्र कुलपति बने रहने और अल्पसंख्यक दर्जे मंजूरी नहीं दी। फिर जून 2014 में अजीज कुरैशी को जो उत्तराखंड के राज्यपाल थे उत्तर प्रदेश का कार्यवाहक राज्यपाल बनाया गया। बस एक महीने के लिए राज्यपाल बने थे मगर वो काम कर गये जिसके लिए पिछले दो राज्यपालों ने सात साल अनुमति नहीं दी थी यानि कि पहले स्टेट यूनिवर्सिटी बननी थी बना दी गई प्राईवेट युनिवर्सिटी और फिर मांग लिया अल्पसंख्यक का दर्जा जिसमें अल्पसंख्यकों के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान था। हां युनिवर्सिटी बनी भी किसका महिमामंडन करने के लिए है उन्हीं मोहम्मद अली और शौकत अली के लिए जिन्होंने बेगानी शादी में दीवाने हो कर तुर्की के खलीफा के समर्थन में भारत में खिलाफत आंदोलन चलाया था जिसका परिणाम मोपाला में हिन्दुओं का भीषण नरसंहार था। ये उन्हीं जौहर बन्धुओं की याद ताजा रखने के लिए है जिन्होंने धर्म के नाम पर देश बंटवाया था और 1947-48 का हृदयविदारक खून खराबा हुआ था। इतने सब के बाद भी आजम खान कहता है कि वो भारत में रह जाने की जिल्लत झेल रहा है।
पूरी पोस्ट पढ़ने के बाद आपने क्या समझा???
मैने उस समय भी समझा था कि एक मौका मिला और वो सारी आपत्तियां जो दो राज्यपालों को थीं तीसरे को अपने मजहब पहले नजर आया और सब आपत्तियाँ हवा हो गयीं।
हम इनको क्यों दोष दें इन्होंने तो अपनी कौम का हित देखा। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने क्या देखा - - - ये भी विश्वास जीतने चले थे 😃😃😃😃 अपनी ही कौम पर गोलियां चलवा कर।
नीचे दी गई तस्वीर हैदराबाद के कांस्टेबल अब्दुल कादरी की है जिसने मुस्लिम दंगाइयों पर गोली चलाने का आदेश देने वाले अधिकारी को यह कह कर गोली मारकर हत्या दी थी कि इसका मजहब अपने मजहबी भाईयों का नुकसान करने की इजाजत नहीं देता है।
फिर से वही कहूंगा बार बार कहूंगा - -
अपनों की चाहतों ने क्या क्या दिये फरेब ।
रोते रहे लिपट कर हर एक अजनबी से हम ।।

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