एक मुख्यमंत्री देश से गद्दारी कर शांतिप्रिय कौम का मसीहा बन गया

1994 की गर्मियों की बात है . लखनऊ में पांच कश्मीरी आतंकवादी घुस आए थे और इस बात की खबर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB ) को लग गयी थी .  उस ज़माने में ATS जैसी कोई संस्था नही हुआ करती थी ....अतः I.B ने यह सूचना  उ0प्र0 पुलिस को देनी पड़ी थी  . पुलिस का छापा भी पड़ा पर कोई पकड़ा नही गया , जानते हैं क्यों ? क्योंकि उ0प्र0 के तात्कालिक मुख्यमंत्री ने अपनी गाड़ी भेजकर उसमें आतंकवादियों को बिठाकर सेफ पैसेज देकर भगा दिया था . यही वो घटना थी जिसके बाद से उ0प्र0 का वो मुख्यमंत्री शांतिप्रिय कौम का मसीहा बन गया ....  खैर

इस घटना को लेकर देश मे बहुत हंगामा हुआ , शांतिप्रिय कौम अड़ गयी थी कि आईबी के डायरेक्टर को सैक किया जाए , देवबंदी तो एक ऐसी मुहीम चला दिए थे कि आईबी जैसी संस्था को ही खत्म कर दिया जाए . पर देश का सौभाग्य था कि उस वक़्त देश में किसी परिवार विशेष का कांग्रेसी प्रधानमंत्री नही था बल्कि कांग्रेस पार्टी में से निकले सच्चे देशभक्त नरसिम्हा राव जी देश के प्रधानमंत्री थे . उन्होंने हर सिचुएशन को अपने लेवल पर हैंडल किया था . संसद में भी इस विषय को लेकर तीखी चर्चा हुई थी . संसद का रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए , उस वक़्त केवल दो सांसदों ने आइबी के पक्ष में बोला था . एक आडवाणी जी और दूसरे चंद्रशेखर जी .

हमारे देश में सेक्युलरिज्म के नाम पर मुस्लिम तुष्टिकरण का इतिहास बहुत पुराना है . तुष्टिकरणबाजों की गद्दारी के घनेरो किस्से हैं . हम बहुत से ऐसे नेताओं को पूजते हैं , जिन्होंने देश के साथ गद्दारी की है ....हमारी सोच इन गद्दार नेताओं ने बदल दी थी , 1994 का वो  गद्दार नेता कौन था समझ लीजिए ......कम से कम #मोदी_जी का इस बात पर एहसानमंद होना ही चाहिए कि उनके युग मे ये सारे नेता बेनकाब हो रहे हैं और क्यों नरसिम्हा राव जी को मरणोपरांत कांग्रेस ने कांग्रेसी मानने से इंकार कर दिया था ?

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