इस पोस्ट का सीधा सम्बन्ध रविष कुमार टाइप के कुबुद्धिजीवी जन्तुओं से ही है...

इस पोस्ट का सीधा सम्बन्ध रविष कुमार टाइप के मौलवी/बुद्धिजीवी जन्तुओं से ही है...

कुछ लोगों की यादाश्त एकदम सटीक होती है।

उन्हें जब सब्जी और अनाज मंहगा होता है, तो गरीब मजदूर याद आते हैं।
और जब सब्जी और अनाज सस्ता होता है, तो किसानों की याद आती है।

उन्हें जब खराब सङके दिखती हैं, तो सरकार की अकर्मण्यता याद आती है।
और सरकार जब सङके चौङी करने लगती है, तो पेङों और पर्यावरण की याद आती है।

उन्हें जब चारो तरफ अतिक्रमण दिखता है, तो नगर निगम का निकम्मापन याद आता है।
और जब अतिक्रमण हटता है, तो बेघर हुए लोगों की याद सताने लगती है।

उन्हें जब विदेश की ट्रेनें दिखती हैं, तो अपने रेलवे की कमी नजर आने लगती है।
और जब रेलवे नयी ट्रेन लांच करती है, तो उन्हें जनरल बोगी वालों की याद आती है।

कुछ ऐसे ही सदैव असन्तुष्ट, असंतोषी, अस्थिर चित्त के लोग कल 'योग दिवस' के दिन गरीब और भूखों को याद करके अपने कपङे फाङ रहे थे।

इन्हें ऐसे ही भौकनें दिया जाना चाहिए।
ये समाधान में समस्या सूंघने की बीमारी से ग्रस्त एंटी सॉल्यूशन वर्ग की नुमाइंदगी करने के लिए ही पैदा हुए हैं।

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