मोदी की जीत से तड़प उठे हैं जस्टिस गोगोई -
कुछ भी कर लो मोदी जी, "चोरों" को जेल नहीं जाने देंगे -
मैंने चुनाव से पहले 2 बार लिखा था कि अदालतें भी चुनाव नतीजों
का इंतजार कर रही हैं जो सभी कांग्रेसी नेताओं की जमानतें हो रही
हैं और किसी को गिरफ्तार नहीं होने दे रहे --
उधर मोदी जी ने भी कह दिया था कि 5 साल में चोरों को जेल के
दरवाजे तक तो ले आया हूँ और अगले 5 साल में ये जेल के अंदर
होंगे --लेकिन क्या न्यायपालिका ऐसा होने देगी, ये सोचने का विषय
है --
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बात से तो ऐसा नहीं लगता कि कोई
जेल भेजा जायेगा --मोदी की अप्रत्याशित जीत से गोगोई साहब खासे
परेशान हैं ये उनके 2 दिन पहले के बयान से पता चलता है --
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की चीफ जस्टिसों की बैठक में कुछ
बातें कहीं हैं जो मोदी पर परोक्ष हमला है और जो साफ़ इशारा करती
हैं कि मोदी जैसे लोकप्रिय नेता की जीत से गोगोई साहब खासे विचलित
हैं :--
--लोकप्रिय ताकतों का उदय भारतीय न्यायपालिका के लिए चुनौती हैं;
--ऐसी ताकतों के उदय से न्यायपालिका के सामने निष्पक्षता बचाने की
चुनौती पैदा हो गई है;
--जजों की नियुक्ति राजनितिक दबाब और प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए;
--न्यायपालिका को लोकलुभावन ताकतों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए
और खुद को मजबूत करना चाहिए -
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गोगोई साहब की ये सब बातें बहुत खतरनाक सन्देश दे रही हैं --गोगोई
साहब ने आगे कहा :--
न्यायपालिका और विधायिका के बीच टकराव से न्यायपालिका के लिए
बहुत खतरनाक दौर बनता जा रहा है --कुछ आलोचक "जजों को गैर-
निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर पेश करते हैं जो बहुमत से निर्वाचित
सरकार के फैसलों को पलट देते हैं --उन्होंने कहा कि --
"लोकप्रिय ताकतें इन दिनों प्रभावी होती जा रही हैं --कोई आश्चर्य की
बात नहीं है कि न्यायपालिका भी कई बार लोकप्रिय ताकतों के दबाब
में आ जाती है"
ये सब बातें इशारा कर रही हैं कि लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी की फिर से
सरकार बनने से बहुत तकलीफ हुई है मगर गोगोई साहब आप खुद
बतायें क्या ये सच नहीं है कि आपकी न्यायपालिका खुद बिना किसी
जिम्मेदारी के सरकार चला रही है --
न्यायपालिका जो चाहती है वो कर
रही है -- दखल मोदी सरकार का नहीं कांग्रेस का
अभी भी चल रहा है --अयोध्या मामले में सिबल ने कहा 2019 के बाद
सुनवाई हो तो वो ही किया गया --
NJAC का कानून संसद ने एकमत से बनाया मगर आपने रद्द कर दिया
और आप सरकार के दखल की बात करते हो --800 साल पुरानी प्रथा
और हिन्दू समाज की भावनाओं को दरकिनार कर आपने सबरीमाला
मंदिर को दूषित किया केवल वामपंथियों के लिए --
नीरव मोदी की जमानत लन्दन की अदालतें 5 बार ख़ारिज कर चुकी
हैं और आप यहाँ हर कांग्रेसी भ्रष्टाचारी को जमानत दे दे कर जैसे
सरकार को खुली चुनौती दे रहे हो कि जो करना हो करो, हम किसी
को जेल में नहीं डालेंगे --5 साल बाद भी ये सभी जेल के दरवाजे पर
ही खड़े मिलेंगे --
सरकार ने न्यायपालिका में तोड़फोड़ नहीं की थी, वो
जजों ने खुद की जिसके लिए वामपंथी जिम्मेदार थे और उन्ही ने, गोगोई
साहब, आपको भी यौन शोषण के केस में लपेटा था --जबकि सुप्रीम
कोर्ट ने इन्ही वामपंथियों को पी एम् की हत्या का षड़यंत्र करने के लिए
भी "असहमति" का अधिकार भी जायज बता दिया --
रोहिंग्या मुसलमानों को देश से निकालना है या नहीं, प्रशांत भूषण और
5 अन्य वरिष्ठ वकीलों की याचिका पर 2 साल से फैसला नहीं हुआ -
सलमान खान के केस की ढाई साल से सुनवाई नहीं हो रही जबकि
फरवरी 2018 में सुनवाई होनी थी --
अभी तो मोदी ने न्यायपालिका के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला है,
तब गोगोई साहब बिलबिला रहे हैं और अगर कुछ बोल दिया तो क्या
होगा -और अब समय आ गया है पी एम् के बोलने का न्यायपालिका
की लेट लतीफी के खिलाफ -
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