आमतौर पर बौद्ध बड़े अहिंसक लोग होते हैं ।
म्यांमार में रोहिंग्या जिहादियों को लगा कि ये तो बड़े आसान शिकार होने चाहिए, बस बौधों को मारकर म्यांमार को इस्लामी मुल्क बनाने का मजहबी कीड़ा कुलबुलाने लगा, सो ज़ेहाद वाला खून खराबे वाला दांव खेल दिया।
दांव उल्टा पड़ गया तो इंसानियत/सेक्युलरिज्म/भाईचारे की बातें याद हो आयी ।
.
देश भर में चोर पकड़े जाने और उसकी कुटाई पिटाई के हर महीने हजारों मामले दर्ज होते हैं ।
कितने ही मामलों में सेंधमार हथियार बन्द होते हैं और पकड़े जाने की नौबत आने पर एक दो कत्ल कर भागते हैं ।
एक कौम है जो चोर के मरने पर भी इस घटना की निंदा कर रही है, एक लोग वो हैं जो औरंगजेब को हीरो मानते हैं ।
.
रही बात भीड़ के नारे लगाने की, वो प्रतिक्रिया है तुम्हारी जिहादियत की ।
तुम सैकंडों सालों से काफिरों को कत्ल करते आ रहे हो, करोड़ो लोगो के खून से लथपथ है तुम्हारी बर्बर कबीलाई सभ्यता, कितने मुल्क, कितनी जाने, कितनी सभ्यताओं को काफिर बता कर निगल चुके हो, अब वो काफिर तुम्हारी फितरत पहचान गया है, तुमको तुम्हारे जाहिल मकसद की राह रोक रहा है, अड़ रहा है तो तुम डर रहे हो ।
जिस दिन लड़ने लगा तो इंसानियत/अहिंसा/गांधी/गंगा जमुनी तहजीब की दुहाई भी देने लगोगे ।
Comments
Post a Comment