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*जैसे ही मिडिल क्लास हिंदुओ के घर मे नए मेहमान आने की सूचना मिलती है*
*तो सबसे पहले वो क्या करते हैं ??????*
*तुरंत अपनी औक़ातानुसार महंगे से महंगे डॉक्टर के पास जाते हैं*
*जिसकी फीस 300-800 तक हो सकती है,,,*
*डॉक्टर दो मिंट के अंदर जांचों एक लंबा चौड़ा पोथन्ना लिखकर पैथालॉजी ट्रांसफर कर देता है,,,*
*इस तरह से पहली ही बार में इन सारी जांचे और डॉक्टर फीस मिलाकर कुल खर्च करीब 6 से 8 हजार रुपये बैठता है*
*अगर सब कुछ ठीक रहा तो ये खर्च हर महीने अनवरत चलता रहता है,,,जब तक कि बच्चा पैदा न हो जाये,,,*
*इतना सब खर्चने के बाद ये भी निश्चित है कि बच्चा ऑपरेशन से ही होगा और उसमें करीब 50 हजार से लेकर डेढ़ दो लाख तक का खर्च आ सकता है .*
*ये मरीज की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है कि डिलीवरी मधुराज नर्सिंगहोम में करानी है या कबीरा में,,,,,,,*
*अब हिन्दू ढाई लाख का लौंडा लेकर अपने घर मे बड़े गर्व से घुसता है*
*जहां उसका भव्य स्वागत होता है भाई ने तीर मार लिया*
*भाई को बेटा/बेटी हुआ/हुई बधाई हो,,,,,,*
*चार साल तक उस ढाई लाख के लौंडे का लालन पालन बेइंतहा लाड़ मोहब्बत में होता है*
*जहां उसे बेड से उतरने भी नहीं दिया जाता क्योंकि इंफेक्शन हो जाएगा,,,,*
*मोहल्ले के लौंडो के साथ खेलने नहीं दिया जाता,,,*
*रकम रकम के महकौआ पौडर क्रीम पोतकर उसकी बॉडी को फूल की तरह मुलायम कर दिया जाता है*
*जहां कहीं भी हल्की सी लड़खडाहट हुई नहीं कि बीस हाथ उसे गोद मे उठाने के लिए तैयार बैठे हैं*
*और उसका नाम रखा जाता है सैंडी,,,,,*
*वहीं देश मे हमारे पूर्वजों की गलती से एक और कौम रहती है*
*देखिए वो क्या करती है,,,,,,,*
*जैसे ही उसे पता चलता है कि जिहादी आने वाला है*
*तुरंत वो निकल पड़ता है* *झलकारीबाई, लोकबंधु, सिविल जैसे सरकारी अस्पतालों में सबसे पहले लाइन में लगके एक रुपये का पर्चा बनवाता है*
*और सारी जांचे मुफ्त कराकर*
*पूरे नौ महीने उसी पर्चे की दवाओं से इलाज कराके*
*सिर्फ एक रुपये में जिहादी की डिलीवरी कराके खुशी खुशी अपने घर को चला जाता है,,,*
*हम सबकी कल्पनाओं से परे,,*
*जिसके बाप दादे पार्टीशन के वक्त उसकी असली जगह पाकिस्तान नहीं गए*
*और वही 2 करोड़ आज 20करोड़ हो चुके हैं,,,,*
*ये तबका आपसे बेइंतहा नफरत करता है,,*
*आपको काफिर समझता है,,*
*मौके की तलाश में है कि कब अवसर मिले और कब तुम सबको काट पीट डालें,,*
*ये _________का एक झुंड है*
*जिसे देश समाज और संविधान से कोई मतलब नही*
*इनकी एक अलग पैरलल किताबी सरकार चलती हैं*
*जिसमें ये अपनी मन की मर्जी के मालिक होते हैं,,,,,,,,*
*इनकी वफादारी सिर्फ इनके अपने ही खून के प्रति होती है,,,*
*इनकी जहालत इनके खून में सनी हुई है,,,*
*ये सिर्फ एक ही भाषा बोलते है,,*
*अपने ही खून को सपोर्ट करते हैं,,,*
*झुंड में आक्रमण करते हैं चाहे जंग हो या वोट,,*
*इसीलिए राजनीतिक पार्टियां इनके हित साधने में लगी रहती हैं*
*जो उनकी सबसे बड़ी भूल है*
*क्योंकि तत्कालीन सत्ताधारी राजनीतिक गुरु बिल्कुल नही जानते*
*कि ये चाहे निहुराके G भी मरा लें*
*मगर ये धड़ा इन्हें कभी वोट नही करने वाला,,*
*ये सिर्फ अपनी ही विचारधारा को वोट करेगा,,*
*ओवैसी, सपा, पीस पार्टी, आजम खान जैसों को वोट करेगा और हमपर आरोप लगाएगा कि हम अमन पसन्द नही है,,*
*उसे मूलभूत सुविधाएं सड़कें बिजली पानी नही चाहिए,,,,,,,*
*उसे तो सिर्फ एक चीज से मतलब है,,,*
*उसकी हुकूमत,,,,,,*
*शरीयत की हुकूमत,,,*
*जिसके लिए वो वो उस देश से भी गद्दारी करता है*
*जिस देश का वो नमक खाता है,,,*
*उसे किसी से कोई मतलब नही होता,,,,,*
*उसे सिर्फ अपना टारगेट नजर आता है,,,,,,*
*ये कभी टैक्स नही भरता*
*लेकिन सबसे ज्यादा सरकारी तंत्र का दोहन करने वाला तबका है,,*
*सरकारी अस्पतालों में,,,*
*सस्ते राशन की दुकानों में,,,,,*
*किसी भी सरकारी योजनाओं की लाइन में 10 में से 7 की भीड़ इसी तबके की होती है,,,,,,,*
*बच्चा कोख में आने से लेकर पैदा होने तक सब कुछ फ्री में करवाता है,,*
*उसके बाद मिलने वाली 6000 प्रोत्साहन राशि मे भी सबसे आगे रहता है,,,*
*इन्ही सरकारी सुविधाओं का भरपूर दोहन करके वो दस दस बच्चे पैदा करता है*
*जो कम उम्र से ही इधर उधर कुछ भी करके अपना पेट भरना शुरू कर देते हैं,,,*
*लेकिन अपने मकसद को कभी नही भूलते,,,,*
*अलीगढ़ की ट्विंकल हो या दिल्ली की निर्भया सब इन्ही सरकारी अस्पताल में पैदा हुए किसी जिहादी के जुनून का परिणाम है,,*
*ये सब बहुत खामोशी से हो रहा है,,,,*
*तुम्हें इसलिए नही पता क्योंकि तुम कभी सरकारी अस्पताल जाते ही नहीं,,*
*किसी लाइन में लगते नहीं,,,,*
*अपनों की तरफ पलटकर देखते नहीं,,,,*
*हमें सचेत रहना होगा,,*
*हमें हर वक्त जागरूक रहना होगा,,,,*
*ये देश हमारा है और हमें ही इसकी सुरक्षा भी करनी है,,,,,,*
*हमारे आने वाले भविष्य के लिए,,,*
*हमारे बच्चों के लिए,,*
*हमारी नई पीढ़ी के लिए,,,,,,*
*हमें अब फैसला लेना ही होगा,,*
*एक स्टैंड तो उठाना ही होगा,,*
*हम सरकारी सुविधाओं का लाभ इसलिए नही लेते क्योंकि हम लाइन में नही खड़े हो सकते,,,*
*स्टाफ की झिड़कियां नही सुन सकते,,,*
*लेकिन ये पूरे दिन लाइन में खड़े रह सकते हैं,,,*
*हर वो चीज जो इन्हें मुफ्त में मिल रही हो उसके लिए वो अपनी G भी मरवा सकते है,,,*
*हम अपने बच्चे की डिलीवरी के लिए मधुराज नर्सिंग होम में डेढ़ लाख रुपये खर्च करते हैं,,,*
*लेकिन वो सरकारी अस्पताल में चार घंटे लाइन में लगकर मात्र एक रूपये में जिहादी की डिलीवरी करवाके खुशी खुशी अपने घर चला जाता है,,,*
*वही जिहादी आगे चलकर मधुराज नर्सिंग होम में डेढ़ लाख रुपये खर्च कर पैदा हुए कैडबरी चूसने वाले तुम्हारे आईपैड धारी कूल डूड लौंडे/लड़की की बेरहमी से किसी बकरे या मुर्गे की तरह गर्दन रेत देता है,,,*
*समझदार कौन है,,,वो या आप,,,,,,,*
*आप अपने डेढ़ लखटकिये लौंडे को पचीस साल तक गुलाब के फूल की तरह पालते हैं,,*
*उसके कैरियर को लेकर अपने बाल तक पका देते हैं. उनको बचपन से खतना करके खून बहाने का शिक्षा की सुरवात होती है।*
*लेकिन वो जिहादी पांच साल का होते ही उछल उछलकर ट्रक के टायर खोलने लगता है,,,*
*ये बहुत बड़ा गैप है जिसे आप नही भर सकते,,,*
*ये सैकड़ो साल से चलती आ रही व्यवस्था है इसे आप अब कभी नही बदल सकते,,,,*
*वो हमपे हर हाल में भारी पड़ेंगे क्योंकि हमारे पास साठ हजार का मोबाइल तो है*
*लेकिन सेल्फ डिफेंस के लिए चार आने की एक सुई नहीं है,,,*
*होगी भी कैसे,,,*
*हमें अहिंसा परमो धर्म की परिभाषा पढ़ाई गयी है...*
*उन्हें काफिरों के कत्ल करने की,,,*
*तुम इसी काबिल हो,,,,*
*इसके जिम्मेदार तुम हो,,,,,,,*
*डेढ़ लाख के लौंडे ,,,,,,*
*तुम लोग ऐसे ही कालिंदी दिल्ली बॉम्बे जैसे धमाकों में मरने वालों की लिस्ट की शोभा बढ़ा सकते हो,,,*
*ट्विंकल के मरने पर मोमबत्तियां सुलगा सकते हो,,,*
*फेसबुक व्हाट्सएप पर ज्ञानदीप बन सकते हो जबकि तुम्हारी एक मच्छर मारने की भी हैसियत नहीं है,,,*
*वो PUBG नहीं खेलता ,,,*
*तुम्हारे डेढ़ लखटकिया सैंडी के कटे हुए सिरों से फुटबाल खेलता है,,,*
*वो एक रुपये में सरकारी अस्पताल के बेड पर पैदा हुआ जिहादी,,,,,,,*
*उससे मुकाबला कहाँ कर पाओगे,,,,,,,,,,,,,,*
*तुम्हें लगता है कि तुम अभी सुरक्षित हो* ,
*ठीक लेकिन तुम्हारे बच्चों का क्या ?*
*उनके लिए भी तो सुरक्षित भारत छोड़ कर जाना है .*
*दशहरा सिर्फ मेला देखने के लिये नहीं होता था शस्त्र पूजन के लिए होता था..*
*शस्त्र पूजन क्यों जरूरी था..*
*क्यों हमारे देवी देवता मुस्कुराते हुए लेकिन शस्त्र युक्त नज़र आते हैं....*
*अपना धर्म हम खुद भूल चुके हैं ऐसे में औरों से क्या उम्मीद रखें।*
*पढ़ कर भूलना नही , विचार करना है . अपने बच्चों की खातिर ....*
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