बाजारवाद ने इस देश को आखिर बना क्या दिया है ????

औरतों के अंदर सेक्स करने की इच्छा पुरुषों से बहुत ज्यादा होती है,औरतों के अंदर सेक्स करने की क्षमता परुषों से सात गुना ज्यादा होती है, और जाने कितने गुना तक बढा के बताया जाता है ????

इस तरह के दावे पूरी तरह मिथ हैं। जबकि सच्चाई तो इसके उलट है। प्राकृतिक रूप से महिलाओं में यौन इच्छा पुरुषों से कम होती है।क्योंकि प्रकृति के अनुसार सेक्स अगली पीढ़ी को जन्म देने का माध्यम है,और कोई भी महिला महीने के तीसों दिन गर्भधारण करने की क्षमता नहीं रखती,प्रकृति ने उसके लिए कुछ विशेष दिन ही निर्धारित किये हैं,और पुरुष हर रोज सन्तानोत्पत्ति की क्षमता रखता है।

इस तरह के दावे बाजारवाद में भारतीय पुरुषों के दिमाग में स्थापित किये हैं। जिससे कि पुरुषों को यौन शक्तिवर्धक योग के नाम पर कोई भी कूड़ा महंगे दामों पर बेचा जा सके।

बाजारवाद महिलाओं को लेकर और ना जाने कितने तरह का कूड़ा लोगों के दिमाग में डाल रहा है, और महिलाओं को एक #कामुक_वस्तु के रूप में स्थापित कर रहा है।

बाजारवाद ने इस देश को आखिर बना क्या दिया है ????

लोग मैरी कॉम को भूल चुके हैं और सन्नी लियोन के मंदिर बन रहे हैं, क्यों ??

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