एक बड़े गृह युद्ध की आहट:

एक बड़े गृह युद्ध की आहट:
हवाओं की सनसनाहट अगर आप नहीं सुन पा रहे तो अपने कान का इलाज कराइये

सबसे बड़ी बात--- इस युद्ध में सबको पार्टीसिपेट करना पड़ेगा वो भी प्रत्यक्ष -  अप्रत्यक्ष नहीं तटस्थ होने का तो सवाल ही नहीं, तटस्थ वो ही रह पाएगा जो या तो देश छोड़ के भाग जाए या दुनिया छोड़ के।

आज जितने इमटे भीमटे, अरपान्डू सरपान्डु, आमी वामी, आपिए सापिए, एकुलर सेकुलर जितने हैं सबको उस युद्ध का हिस्सा बनना पड़ेगा, चाह के भी भाग नहीं पाएगा कोई।

अब मुसलमानों के बाहर बैठे आका ये अच्छी तरह समझ गये हैं कि भारत में सामाजिक और राजनैतिक परिवर्तन बहुत तेजी से हो रहा, राष्ट्रवादी ताकतों का बर्चस्व बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा, राष्ट्रबिरोधी तत्व दिन प्रतिदिन कमजोर होते जा रहे,
बात भाजपा या आरएसएस की नहीं है, आने वाले १०-१५ सालों में हालात पूरी तरह बदल जाएंगे, बिकल्प भी वही पार्टी बनेगी जिसकी नीतियां और बिचार दक्षिण पंथी हो
बाहर बैठे आका अब समझ गये हैं कि जितनी देर होगी इस्लाम उतना ही कमज़ोर होता जाएगा भारत में, इसलिये बहुत जल्दी आशमानी किताब का हुक्म नाजिल होगा कि भारत में इस्लाम खतरे में है और सारे मुसलमान देश के खिलाफ यलगार कर देंगे
उनकी एक ही माँग होगी-- एक अलग देश
इससे कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं होगा; इस आन्दोलन के लिए उन्हें पर्याप्त मात्रा में धन और हथियार बाहर से मुहैया कराए जाएंगे।

कश्मीर से इसका आगाज हो चुका, बंगाल केरल आसाम और बिहार, पश्चिमी यूपी, राजस्थान और एमपी के कुछ जिलों में बाकायदा इसकी तैयारी शुरु हो चुकी है
छिटपुट और छोटा मोटा प्रयोग तो काफी दिनो से चल रहे, पर अब बडा करने की तैयारी शुरु हो चुकी है।

ऐसा नहीं की इंटेलिजेंस एजेन्सीयों को इसकी खबर नहीं, वो तैयारी भी कर रहे और इसे फ्लॉप करने का प्रयास भी, पर ये समस्या ऐसी है जिसका कोई इलाज किसी भी देश में सरकारी स्तर पे सम्भव ही नहीं है( कुछेक अपवाद देश को छोड़ के)
भारत में तो बिल्कुल नहीं, इसका समाधान सिविल सोसाइटी स्तर पर ही हो सकता है और होगा भी।

तो हे सिक्युलरों अब तुम पर निर्भर है कि 1 लाख के मोबाइल फोन, 4 लाख का TV, 3 लाख के डबल डोर वाले फ्रिज या महँगी कार खरीदते हो या फिर 25 - 50 हजार के हथियार। मुसलमान कभी महँगे गैजेट्स नहीं खरीदता वो या तो चुरा लेते हैं या फिर जैसे अफगानिस्तान का किस्सा पुराना हो गया कश्मीरी पंडित अपना कश्मीर छोड़ कर भागे थे और अगर कश्मीरी पंडित भी याद न हों तो कैराना मेरठ बंगाल देख लो।

जिन्हें यह लेख कपोल कल्पना लगता है उन के लिए हमारी हार्दिक शुभकामना.......

अगर काल के कपाल पर लिखा हुआ सन्देश आप पढ़ सकते हैं तो फिर शेयर करके जागरूक कीजिये अपने हिन्दू भाइयों को ...

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