वाकई देश का दुर्भाग्य तो उसी दिन शुरू हो गया था
1} जब नेहरू चीन से युद्ध हारने के बाद स्वयं को भारत रत्न पुरस्कार लिए थे।
2} 1971 दो देशों के आपसी लड़ाई में बेवजह भाग लेना। और उनके 93000 फौज को घूटने पर लाकर भी काश्मीर को वापस लिए बगैर सेना वापस छोड़ देना।
और इस तुच्छ और कमजोर हरकत को अपनी उपलब्धि बताकर 1971 का चुनाव जीतना इससे बड़ा देश का दुर्भाग्य क्या हो सकता है।
3} इंदिरा गांधी भिंडरावाले को पैदा की और जब वो निरंकुश हो गया तो उसे कुचलने के लिए स्वर्ण मंदिर जैसे पवित्र स्थान में फौज भेज दी। हजारों बेकसूर मारे गए।
करपात्री महाराज जो की उनके गुरु थे उनकी मांग गौवध रोकने की, इसके खिलाफ हजारों समर्थक सहित संसद परिसर में गोलियों से भून दिए गए। इसके तत्काल बाद इस बहादुरी के लिए उन्होंने स्वयं को भारत रत्न पुरस्कार लिया।
4} राजीव गांधी जो स्वयं के काबिलियत पर नहीं इंदिरा गांधी के अस्थि कलश लिए 1984 के 545 लोकसभा क्षेत्र मे घूमें और चुनाव जीते।
5} श्रीलंका की आपसी लड़ाई में बेवज हजारों सैनिकों को भेजना और वहां उनके साथ अपमान जनक ब्यवहार होना और हजारों सैनिकों का मारा जाना, इसके चंद महिने बाद इस उपलब्धि के लिए स्वंय को भारत रत्न लेना।
ये क्या देश का दुर्भाग्य नहीं।
विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मुस्लिम देश होने के बावजूद सतर वर्षों मे 56 मुस्लिम देशों ने हिकारत भरी नजर से देखी। इंदिरा गांधी के रिक्वेस्ट भेजने के बावजूद ओपेक संगठन ने इंदिरा को ठुकरा दिया था। सतर बरसों के शासन के बावजूद मुस्लिम न शिक्षा न स्वास्थ्य और न देश की मुख्य धारा में अपने को शामिल कर पाये सिर्फ एक पार्टी के गुलाम बनकर रहना पसंद किए।
इन पाँच सालों में एक दुष्ट पाकिस्तान को छोड़कर सभी मुस्लिम देश हमारे मित्र या भाई है
अरब का सर्वोच्य पुरस्कार मोदीजी को मिलता है
अरब में मंदिर तक बनते है
इरान जैसा देश जो भारत को तुच्छ समझता था आज बंदरगाह मुहैया करा रहा है
दुबई जो अपने को मुसलमानों का चौकीदार समझता था आज हमारा सबसे विश्वसनीय मित्र बना है और हमारे देश में तेल का स्टाक बनाने और रखने में मुख्य भुमिका निभा रहा है
वो हमारे देश में तेल रखकर दूसरे देशों को बेंचने को तैयार हुआ है और नेपाल भुटान और बांग्लादेश को बेच भी रहा है बंगलौर के तेल कुएँ से।
मुस्लिम देशों का सबसे बड़ा संगठन ओपेक जिसने कभी इंदिरा गांधी का अपमान किया था
आज बड़े शिद्दत से सुषमा स्वराज को बुलाता है वो भी भारतीय परिधान में स्वीकार करता है। और नीतिक निणार्यक मंडल में शामिल किया।
ये मोदी है जो सभी दुश्मनों को भी अपना खेवनहार बना लेता है
अगर ये देश का दुर्भाग्य है तो हमें ऐसे दुर्भाग्य स्वीकार है
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