लगभग 55 बरस पहले जब सोना 35 रू का दस ग्राम बिकता था तब एक "योगी" को 30,000 रू के वार्षिक सरकारी अनुदान पर नेहरू लाये थे।
योग विरोध के मानसिक दीवालियेपन में अभी और कितना बेनकाब व नग्न होगी कांग्रेस.?
21 जून को योग दिवस पर होने जा रहे आयोजनों पर फ़ूहड़ फब्तियां कस रही, उन आयोजनों का अराजक अश्लील विरोध कर रही कांग्रेस प्राचीन भारतीय सभ्यता की गौरवमयी स्वर्णिम विरासत "योग" पर पिछले कुछ दिनों से निरंतर निर्लज्ज प्रहार कर रही है।
कांग्रेस आज जिस नेहरू-गांधी परिवार की चाकरी और चाटुकारिता तक सिमट चुकी है उसी परिवार के जवाहरलाल नेहरू ने आज से लगभग 55 बरस पहले जब सोना 35 रू का दस ग्राम बिकता था तब एक "योगी" को 30,000 रू का वार्षिक सरकारी अनुदान का उपहार देकर दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला में ''योग'' विद्या का विशाल प्रदर्शन बाकायदा सरकारी पैसे से सरकारी तत्वाधान में कराया था।
उस प्रदर्शन में नेहरू सरकार के सारे कैबिनेट मंत्री समेत तब के राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद भी शामिल हुए थे।
उस योगी को एक मंत्री ने दिल्ली के जंतर मंतर पर योग केंद्र बनाने के लिए स्थान तक दिया था।
कांग्रेसी यह भी समझ ले कि नेहरू ने जिस योगी से "मोटी" सरकारी रकम खर्च कर फ़िरोज़शाह कोटला मैदान में योग प्रदर्शन करवाया था वह नेहरू-गांधी परिवार का पारिवारिक योगी था।
उसका नाम था धीरेन्द्र ब्रह्मचारी जो बाद में अपनी ऐय्याशी आपने भ्रष्टाचार और सत्ता के दलाल के रूप में अत्यंत कुख्यात हुआ था और जिसने अपनी इन्हीं करतूतों से निजी जेट विमान ही नहीं खरीदा था बल्कि अपने आश्रम के पास सरकारी अमले से एक निजी हवाई पट्टी तक बनवा ली थी।
अतः आज के योग दिवस को तमाशेबाज़ी सरकारी फ़िज़ूलखर्ची बताकर आगबबूला हो रही कांग्रेस यह बताये कि, 55 साल पहले जवाहर लाल नेहरू ने जो किया था वो तमाशा था...??? सरकारी फ़िज़ूलखर्ची थी या कुछ और...?
नीचे की फोटो 29 साल पहले देश की सबसे बड़ी अंग्रेजी पत्रिका रही "इलस्ट्रेटड वीकली" की आवरण कथा के रूप में छपे उस कुख्यात योगी के इंटरव्यू के एक हिस्से का है जिसमे वो खुद पर बरसी नेहरू-गांधी कांग्रेसी परिवार की कृपा का बखान कर रहा है।
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