कहीं एक दलित चिंतक का भाषण हो रहा था । ब्राह्मणों को खूब गालियां दी गई। खूब तालियां भी बजी।

कहीं एक दलित चिंतक का भाषण हो रहा था ।
ब्राह्मणों को खूब गालियां दी गई। खूब तालियां भी बजी।

उनके बयान आये की ब्राह्मणों ने हमे कर्मकांड और पूजा पाठ में उलझा कर लूट लिया।

सही भी है ब्राह्मणों ने लूट लिया भाई
सही में लूट लिया ..... सब को लूट लिया।

इस उदाहरण से समझने का प्रयास करते है..

एक साधारण शादी जिसमे कम से कम 5 से 10 लाख तो जरूर खर्च होते ही हैं...
उसमें ब्राह्मण की दक्षिणा कितनी..?
ज्यादा से ज्यादा 1001/- या 2001/- या 5001/-
सच में लूट लिया...एकदम से लूट लिया...

अब आते है अन्य समुदाय पर जिनके लिये शादी में खर्च होता है...

हलवाई पर खर्च ------ कम से कम 20-25000/- (किस समुदाय से हैं)
टेन्ट पर खर्च------ कम से कम 35-40000/- (किस समुदाय से हैं)
सब्जियों पर खर्च------20-25000/- (किस समुदाय से हैं)
किराना का खर्च ;-------50-60000/- (किस समुदाय से हैं)
बैंड का खर्च;------20-30000/- (किस समुदाय से हैं)
दूध पर खर्च-----30-40000/- (किस समुदाय से हैं)
डाला-डलिया पर खर्च-----2-3000/-(किस समुदाय से हैं)
मिट्टी के बर्तन पर ख़र्च-----4-5000/- (किस समुदाय से हैं)
फूल-माला व स्टेज पर खर्च--------10-15000/-(किस समुदाय से हैं)
कपड़े पर खर्च-------- 50-60000/- (किस समुदाय से हैं)
इसके अलावा और भी खर्च होने वाले समुदायों पर एक नजर डाल लें...

अब कुल 5-10 लाख के खर्च में ब्राह्मण को क्या मिला 1000-2000/- रूपये मात्र..!

लेकिन ब्राह्मण ने ही लूट लिया सब मिलाकर लूट लिया।

नेताओं की सोची समझी रणनीति के तहत समाज में विभेद पैदा किया जा रहा है, जिससे सभी समुदायों के बीच वैमनस्यता बढ़े और समाज विखंडित हो जाये और ये साले नेता घोटाला पर घोटाला करते रहें

ईश्वर ने सभी समुदाय को रोजगार दिया है न कि किसी विशेष समुदाय ने किसी अन्य को लूटने का प्रयास किया है..!

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