#इल्लुमिनाति रहस्य #विश्व पर्यावरण दिवस भारत या एशिया के परिपेक्ष्य में

#इल्लुमिनाति रहस्य

#विश्व पर्यावरण दिवस

भारत या एशिया के परिपेक्ष्य में

ज्येष्ठ माह में आज 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है,भारत मे भी मनाया जा रहा है।  पौधारोपण के लिए लाखों लोग सामाजिक सस्थाओ, सरकारी विभागों, स्कूल कालेज के विद्यार्थियों आदि के साथ 45 से 50 डिग्री के तापमान में पौधे सूखी भूमि पर लगाये जायेंगे , इतनी तेज धूप कि सवेरे बाहर बाल्टी में रखा पानी शाम तक आधा हो जाता है, भाप बनकर उड़ जाता है।
चैत्र नवरात्रि के बाद ही धूप तेज होने लग जाती है और ज्येष्ठ ( मई जून का आधा आधा भाग) माह तक तक तो सूर्यदेव साक्षात अग्नि का गोला बन जाते है।
तो भारत मे,एशिया में आग बरसती है जोकि ये क्षेत्र equator भूमध्य रेखा के ऊपर तरफ स्थित है और सूर्यदेव की दूरी इस माह में इस क्षेत्र से निकटतम,सीधे होती है,तिरछी नही,इसलिए प्रकाश किरणे सीधे पड़ती है।

अब जानिए प्राचीन ऋषियों के विज्ञान को।
इस वर्ष 2019 अगस्त में 3 अगस्त को #हरियाली तीज मनाई जाएगी, हर वर्ष हिन्दू श्रावण माह की शुक्ल पक्ष तृतीया को ये त्योहार मनाने की परंपरा ऋषियों ने बनाई थी और इस दिन ही घर के बुजुर्ग लोग गाँव के आस पास की खाली भूमि में आम की गुठलियां डालते थे या अन्य फलदार वृक्षो के बीज,गुठलियां डालते या पौधे लगाते थे।

इसके वैज्ञानिक पक्ष को जानिये। हिन्दू धर्म मे श्रष्टि का आरम्भ भी चैत्र शुक्ल से हुआ माना जाता है अर्थात प्रकृति माता की शक्ति शुक्ल पक्ष में प्रबल होती है।
आधुनिक विज्ञान की शोधों के अनुसार शुक्ल पक्ष में चंद्रमा के बढ़ते आकार के प्रभाव से जमीन से जल ऊपर उठकर पौधे के ऊपरी अंतिम बिंदु ,फूलों, फलों तक पहुचता है और पौधे में जलसंचार पूर्णिमा में उच्चतम स्तर पर रहता है, इसलिए कुछ विशेष जड़ी बूटियां पुर्णिमा पर रात को तोड़ी जाती है।
हरियाली तीज के समय तक (अगस्त माह) बारिश भरपुर हो चुकी होती है, भूमि में बहुत नमी , गीलापन रहता है जोकि #फलदार वृक्षो की गुठलियों आम, जामुन, अमरूद, आंवला, नीबू आदि या औषधीय पौधों के लिए सर्वाधिक अनुकूल वातावरण होता है
तो
पृथ्वी पर ( यानी प्राचीन भारतवर्ष में, जम्बूद्वीप में) हमेशा फल उपबलब्ध रहे,पशुओं को छाया, पत्ते खाने मिले, छाया मिले,पक्षियों को घोसला एवम फल मिले, इसके लिए ऋषियों ने जम्बूद्वीप के अनुकूल मौसम श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में #हरियाली तीज का त्योहार बनाया और हिन्दूधर्मी लोग माता पृथ्वी की सेवा हेतु फलो कि गुठलियां या पौधे रोपण करते थे और #इस माह में रोपित पौधे खुद के लिए प्राकर्तिक रूप से ही जल प्राप्त करते रहते थे , और 8 माह बाद होली आने तक विकसित हो जाते थे , देख रेख की विशेष आवश्यकता नही पड़ती थी

लेकिन

ईसाई यूरोप के प्रभाव में, जब 5 जून  को भारत मे एवम एशिया में तापमान 45 से 50 डिग्री है, 30 मिंट में धुला हुआ शर्ट धूप में सूख जा रहा है, पानी की त्राहि त्राहि मची हुई है, तब क्या पर्यावरण दिवस मनाना उचित है या ऋषियों द्वारा निर्धारित भरपूर पानी के वर्षाकाल में प्राचीन नाम के साथ हरियाली तीज मनाना उचित है ?
5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने के बाद कितने पौधे जीवित मिलेंगे 5 जुलाई तक ?
जबकि
श्रीराम चन्द्र जी के समय से मनाया जाने वाला हरियाली तीज त्योहार के कारण भारत देश मे 70%भूमि क्षेत्र में पर्याप्त जंगल हुआ करता था।

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