बिना मोदी सरकार द्वितीय के पहला कदम चले, बहुत से लोग आह्लाद की अवस्था मे इसलिये है क्योंकि वे राष्ट्रवाद या हिंदुत्व के आखरी शब्द है। वे मान कर ही चले है कि मोदी का दुबारा आना, उनके साथ छल है।

बिना मोदी सरकार द्वितीय के पहला कदम चले, बहुत से लोग आह्लाद की अवस्था मे इसलिये है क्योंकि वे राष्ट्रवाद या हिंदुत्व के आखरी शब्द है। वे मान कर ही चले है कि मोदी का दुबारा आना, उनके साथ छल है।

यह संभव है कि वे, भारत व हिंदुत्व के प्रति, मोदी से श्रेष्ठ व्यक्ति हों लेकिन इसके साथ यह भी सत्य है कि वे न खुद विकल्प है और न ही विकल्प दे पाये है। मुझ को यह पूर्ण विश्वास है कि वे विकल्प बनने के लिए श्रम व ईमानदारी दिखा सकेंगे तो 2 दशकों के बाद, वे निश्चित रूप से सार्थक होंते हुये दिख सकते है।

यह तो हो गयी भविष्य की बात इसलिये स्थायी अवसादियों को छोड़ते हुए, हमको उस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो वर्तमान हमारे सामने रख रहा है। यहां मैं यह कहना चाहूंगा कि आज नेशनल एजुकेशन पालिसी नेट पर उपलब्ध है (link: https://t.co/SOjaroI4ep), आप अपना योगदान, वहां अपने सुझाव देकर, कर सकते है। आप अपने सुझाव, nep.edu@nic.in पर ईमेल द्वारा, 30th जून 2019 तक दे सकते है।

मैं समझता हूँ हमे क्या चाहिए वो सही है लेकिन उस पर आक्रोश करने से बेहतर यह है कि वर्तमान में हम क्या योगदान दे सकते है, वह उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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