कुछ मित्र तलवार भांज रहे हैं कि मोदी सेक्युलर हो गया है, तुष्टिकरण हो रहा है.. मोदी मंदिर में जाकर माथे पर टीका चंदन लगा के बेवकूफ बनाता है... मोदी ने तलवार निकाल के अभी तक शांतिदूतों को काटना चालू नहीं किया... शांतिदूतों को काटो मोदी नहीं तो 2024 में देख लेंगे....

कुछ मित्र तलवार भांज रहे हैं कि मोदी सेक्युलर हो गया है, तुष्टिकरण हो रहा है.. मोदी मंदिर में जाकर माथे पर टीका चंदन लगा के बेवकूफ बनाता है... मोदी ने तलवार निकाल के अभी तक शांतिदूतों को काटना चालू नहीं किया... शांतिदूतों को काटो मोदी नहीं तो 2024 में देख लेंगे....

कुछ माह पहले एक शम्भू रैगर ने एक बांग्लादेशी को जला दिया था और उसका वीडियो डाल दिया था.. तब इन्ही अनेकों मित्रो के वाल पर आँसू रुक नहीं रहे थे... शम्भू रैगर ने सनातन विरोधी काम किया बोल/लिख कर पका डाला था... महान हिन्दुत्व की परम्परा को शम्भू रैगर द्वारा बदनाम करने पर खूब आँसुओं की नदियां बहाई गई थी... निजी तौर पर हमारा तब से आज तक शम्भू रैगर मामले को संविधान द्वारा तय किए गए मानकों द्वारा सज़ा देने का पक्ष रहा है...

सत्य ये है कि, मोदी को वोट 31-40% ही मिला था लेकिन वो PM 100% के हैं... उसी तरह जैसे मनमोहन सिंह को 10 वर्ष 22% या 24% वोट मिला लेकिन वो PM 100% के थे.... योगी CM पूरे UP के हैं जैसे अखिलेश थे.. संवैधानिक पद पर बैठे हर व्यक्ति को पूरी जनसंख्या का ख्याल रखना पड़ता है.. सरकार उसी अनुसार सबके लिए योजनांए बनाती है आगे काम करती है... हवा, पानी, सड़क, रेल, योजना, बैंक आदि सब हिन्दू मुसलमान सिक्ख ईसाई नहीं होती.... आपने उसका कितना फायदा उठाया वो आपकी बात है.. मुसलमान अगर जन धन, मुद्रा, बीमा आदि का फायदा ले रहा है तो वो उसकी जागरुकता है और आप नहीं ले पा रहे तो वो आपका निकम्मापन.. इसके लिए किसी मनमोहन, मोदी, अखिलेश या योगी की क्या जिम्मेदारी... कोई सब योजना का फायदा लेकर वोट नहीं देगा ये उसका चुनाव है, आप फायदा नहीं लोगे फिर गाली दोगे और वोट नहीं दोगे वो भी अपाका चुनाव है...

राम मंदिर, धारा 370 या UCC का मुद्दा जरूरी है उसका समाधान होना चाहिए उसके लिए मोदी को चुना है.... चुना है तो विश्वास रखो.... केंद्र सरकार के रूप में पद पर बैठे मोदी, राजनाथ, गड़करी आदि या UP के मुखिया योगी को क्या ये मुद्दे कितने जरूरी हैं नहीं मालूम? क्या उनको इन मुद्दों पर काम करना है नहीं मालूम?

मालूम है और शायद आपसे ज्यादा मालूम है... मांग हम लोगों की भी सही है क्योंकि उसको पाना अपना चाहत है और इनकी उम्मीद भी इसी सरकार से है... मांग उठाते ही रहना चाहिए... लेकिन आपके शब्द न सिर्फ अब घातक होते जा रहे हैं बल्कि उस तरफ बढ़ रहे हैं कि अगर इन सब कामों को कर दिया जाए तो आप फ्लोटिंग वोटर को भड़का चुकने की ओर बढ़ रहे हैं....

आप इसी लाइन पर लगे रहिए.... अगली सरकार क्या करने वाली उसका आपको अंदाजा नहीं है... मनमोहन सही समय निकाल लिए अगला हलक से जुबान निकाल लेगा... ये TV चैनल के डिबेट में होने वाले उनके वक्तव्यों से पता है, नहीं समाझते तो आप बहुत मासूम हैं ..

सम्राट हेमू तो युद्ध मैदान में उतरा था कि उसको जीतना है या हारना है... दोनो स्थिति में उसको परिणाम पता था - जीत पर राज और हार पर मौत... लड़ाई के मैदान से हेमू नहीं भागा था ... जिस सेना के बल पर लड़ने चला था वो भागी थी .. हेमू तो वीरगति को प्राप्त हुआ, लड़ाकू योद्धा कहलाया इतिहास में... गुलामी और हर प्रताड़ना भागने वाले सेना के उत्तराधिकारियों ने झेला ....

1857 की लड़ाई में तात्या टोपे भी जिस योजना को लेकर उतरे थे उसमे जीत पर राज और हार पर मौत ही होनी थी.... अपने नेता के योजना को पलीता लगाने वाले अति उत्साही सैनिकों को क्रूर मौत और उनके वंशजों को गुलामी मिली.... जबकि तात्या टोपे वीर योद्धा कहलाए और हमेशा रहेंगे... अपने नेता और योजनाकार को भोथरा करके 1857 से पूर्ण गुलामी लिखा लिया था जिसका दंश 100 वर्षों पीढ़ियों ने झेला था... तात्या टोपे तो अमर रहेंगे और हीरो ही रहेंगे....

आगे चुनाव आपका... भविष्य आपके पीढ़ियों का...

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