काश_मैं_यह_पहले_मान_जाता_कि ,,,, #बैन्डमास्टर_से_काग्रेस_अध्यक्ष बने #सीताराम_केसरी को बेइज्जत कर #सोनिया_गांधी को बनाया गया था अध्यक्ष..


#काश_मैं_यह_पहले_मान_जाता_कि ,,,,

#बैन्डमास्टर_से_काग्रेस_अध्यक्ष
बने
#सीताराम_केसरी को बेइज्जत कर #सोनिया_गांधी को बनाया गया था अध्यक्ष..
#कांग्रेस के दिवंगत अध्यक्ष सीताराम केसरी पूरी जिंदगी ईमानदार रहे, लेकिन परिवारवाद की पोषक कांग्रेस के कारण इस दलित नेता को कितना अपमान झेलना पड़ा इस बात का प्रमाण नीचे दी गई तस्वीर है।
ये #तस्वीर उन दिनों की है जब सोनिया गांधी से त्रस्त होकर सीताराम केसरी अपने से उम्र में कई साल छोटे नरसिम्हा राव के कदमों में झुकना पड़ा था…
फिर भी नरसिम्हा राव उन्हें सोनिया के कहर से नहीं बचा सके।
दरअसल 1997 में कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन के दौरान ही सोनिया गांधी पहली बार कांग्रेस पार्टी की साधारण सदस्य बनी।
उस समय सीताराम केसरी कांग्रेस के अध्यक्ष थे। लेकिन सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनने की तीव्र इच्छा जाग गई।
कांग्रेस पार्टी पर कब्जा करने की इतनी जल्दी थी कि सीताराम केसरी को बीच कार्यकाल से ही हटाना चाहती थीं। लेकिन सीताराम केसरी अपना पद नहीं छोड़ना चाहते थे। तब दिग्विजय सिंह, अहमद पटेल के साथ अन्य कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने की साजिश रची। अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा करने से तीन साल पहले ही कांग्रेस ने 80 साल के इस बुजुर्ग दलित नेता का अपमान किया।
सोनिया गांधी के लिए सारे नियम कायदे ताक पर रख दिये गए
सोनिया गांधी के लिए कांग्रेस के सारे नियम कायदे को ताक पर रख दिया जिस सोनिया गांधी ने कभी कहा था,,,,,,,
”अपने बच्चों के हाथ में कटोरा दे देंगी लेकिन राजनीति मे नही आएंगी।
हुआ यूं कि 14 मार्च 1998 को सीताराम केसरी के बारे में कांग्रेस कार्यसमिति ने कहा कि उन्होंने इस्तीफे की पेशकश कर दी है।
कांग्रेस के संविधान की धारा 19 (जे) के तहत उनकी सेवाओं के लिए आभार प्रदर्शन का प्रस्ताव पढ़ना शुरू कर दिया गया। लेकिन केसरी ने जब इस कदम को असंवैधानिक करार दिया तो सबने उन्हें डांट कर चुप करा दिया।
वे तैश में उठ कर खड़े हुए तो किसी ने उनकी धोती खींच दी।
इस दलित नेता को बेइज्जत कर कार्यसमिति की बैठक से धक्के देकर बाहर कर दिया गया। वह बाहर आए तो उनकी केबिन से उनका नेमप्लेट तक हटाया जा चुका था !
और
वहां सोनिया गांधी का नेमप्लेट लग चुका था।
उस समय टीवी पर पूरे देश ने एक बुजुर्ग दलित नेता को कांग्रेस के इस कुकर्म से आहत होकर फूट फूट कर रोते देखा था।
तब उन्होंने कहा भी था कि काश वो बाबा साहब #अम्बेडकर की बात मान लेते कि
‘कांग्रेस न अभी दलितों की हितैषी है न कभी थी और न कभी रहेगी।’

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