नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

आज कुछ लोगों को देखा जो बोल रहे थे कि केरल के लोग शिक्षित हैं इसलिए कांग्रेस को वोट दिया 😀😀

दरअसल ऐसे लोग या तो नादान हैं या परम् चूतिये क्योंकि पहली बात तो इन्हें केरल के बारे में कोई जानकारी नहीं और दूसरी बात इनको कांग्रेस की इतनी बड़ी हार अभी तक सही कारण समझ नहीं आया है।

मुझे जैसे ही केरल की साक्षरता का ज्ञान दिया गया तो मुझे पहली बात याद आयी वो थी #मधु की हत्या क्योंकि उस साक्षरता की मानसिकता वाले लोग गरीब को इंसान नहीं कीड़ा-मकोड़ा समझते हैं क्योंकि संस्कार के बिना साक्षरता दिशाहीन होती है यानी बात साक्षरता की नहीं विचारधारा की है।

अब बात करते हैं केरल की तो वँहा की राजनीति कुछ अलग रही है वँहा कांग्रेस और वामपंथ  राजनीतिक क्षेत्र में मुख्य पार्टी हैं लेकिन आरएसएस की सालों की मेहनत और निःस्वार्थ सेवाभाव ने एक नई विचारधारा को जन्म दिया है जो राजनीतिक क्षेत्र में अपनी जड़ें फैला रही है भले ही सीट नहीं मिली हो इसबार लेकिन जनाधार अवश्य बढ़ा है जो वामपंथ के लिए चिंता का विषय था इसलिए जो सीट भाजपा जीत सकती थी वँहा वामपंथ ने अपनी राजनीतिक विरोधी कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग कर के भाजपा को हर दिया।

और वामपंथ सरकार की ऐसा करने की वजह थी कि राजनीतिक विरोधी कांग्रेस रहेगी तो अगली बार सत्ता बदल भी सकती है क्योंकि दोनों पार्टी की विचारधारा लगभग एक ही है लेकिन अगर भाजपा आ गयी तो ये राजनीतिक नहीं बल्कि विचारधारा का बदलाव होगा और जिस हिसाब से केरल में दक्षिणपंथी विचारधारा का प्रसार हुआ है उससे वामपंथ बहुत घबराया हुआ है।

अगर आप केरल के लोगों के सम्पर्क में नहीं भी हो फिर भी इस बदलाव को आप केरल में आई बाढ़ और सबरीमाला मन्दिर के संघर्ष से समझ सकते हो।

एक दूसरी बात जो मैं बताना चाहता हूँ वो ये है कि जिस #टिकटोक को बंद करने के लिए आप हायतौबा कर रहे हो वही टिकटोक केरल में रणक्षेत्र बना दिया गया था राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी लोगों ने वामपंथ की ऐसी हवा निकली थी कि देखने को बनता था जिसके समर्थन में मैंने भी टिकटोक पर एक वीडियो बनाया था। और यही वो हवा थी जिसके कारण केरल में इसबार भाजपा को 3-4 सीट पर विजय होने की बात कही जा रही थी खैर हार-जीत होती रहती है लेकिन विचारधारा का परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण होता है।

अब जो लोग केरल की साक्षरता को लेकर भाजपा की हार पर मजाक बना रहे हैं उन लोगों को समझाना चाहता हूँ कि पहली बार भाजपा के पूरे भारत में मात्र 2 सीट जीतने पर ऐसे ही मजाक बनाया गया था उसके बाद अटल जी ने जो बात कही थी वो सबको पता ही होगी। और वो बात अटल जी ने इसलिए कही थी क्योंकि उन्हें विचारधारा में परिवर्तन दिख रहा था और बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समय तो लगता ही है। यही बात मैं केरल के विषय में देख रहा हूँ क्योंकि केरल का भविष्य मुझे भगवामय दिख रहा है क्योंकि आरएसएस की निःस्वार्थ सेवा और बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा देर से ही सही लेकिन केरल को मुख्यधारा में अवश्य लेकर आएगा और इस बदलाव को केरल की हवा में आसानी से देखा जा सकता है।

बड़े लक्ष्य में समय लगता है बस आप कर्मठ बने रहो इसका वर्तमान ताजा उदाहरण स्मृति ईरानी जी द्वारा राहुल गांधी को उनके गढ़ में जाकर हराना है क्योंकि पहली बार जब राहुल के खिलाफ वो चुनाव लड़ने गयी और हार हुई तो लोगों ने मजाक उड़ाया था लेकिन निरंतर कर्मठता से निःस्वार्थ सेवाभाव से जो विचारधारा में बदलाव आता है उसके परिणाम कुछ देर से मिलते हैं और आज आप सभी ने देखा कि राहुल गाँधी यानि कांग्रेस के अध्यक्ष को उसके ही घर में हारना पड़ा फिर ये तो केरल है जो 5 नहीं तो अगले 10-15 साल में भगवामय होकर ही रहेगा क्योंकि हमें अपनी विचारधारा पर विश्वास है और उसके परिणामों के लिए धैर्य भी है ।।

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे🚩🚩

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