साध्वी प्रज्ञा जी आप बहुत भावुक हैं
धरातल पर सच यह है कि किसी भी आठवीं के बच्चे को पूछो कि गाँधी के बारे में क्या सोचता है तो वो हँस कर गांधी के प्रति अपनी घृणा प्रकट कर देगा... परन्तु उस बच्चे को कहो कि गाँधी पर निबंध लिखो तो ऐसी ऐसी दैवीय उपमाओं का प्रयोग करेगा कि पढ़कर लगे गाँधी तो भगवान का दूत है।
हम चारित्रिक रूप से परम दोगले समाज हैं... अध्यापक भी अकेले में गाँधी को गाली देता है और छात्र भी... परन्तु सार्वजनिक रूप से दोनों ही झूठ बोलते हैं।
कल सुबह से ही मोदी के बयान पर डिजिटल तलवारें भाँज रहे वीर सपूत जरा सा चौड़े में गांधी को गाली देकर देखो, चार लोग साथ नहीं देंगे, बल्कि 50 लोग महात्मा गाँधी की जय बोल देंगे।
ये सब मोदी जानते हैं... एक घाघ राजनेता को जो कहना चाहिए वो उन्होंने कहा...
साध्वी प्रज्ञा ने करकरे के बाद ये तीसरी गलती की है
इस देश के हिंदू साहसी होता तो हर शहर में एक चौराहा गोडसे के नाम पर होता,
परन्तु नहीं है... जबकि गाँधी के नाम पर बहुत कुछ है अर्थात... वो मत कहो साध्वी जी जो सच है... वो कहो जो इनको डराए नहीं।
मोदीजी से सीखो... योगीजी से भी सीखो
गोडसे जी पर प्रज्ञा जी से मोदी जी कहिन-
काने को काना मत कह, तू बांध ले गांठ...
धीरे धीरे पूछना, तेरी कैसे फूटी आँख... ?
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