क्षत्रियो के अत्तीत और वर्तमान की वस्तुस्थिति

क्षत्रियो के अत्तीत और वर्तमान की वस्तुस्थिति

किसी काल में आवश्यकता कि पूर्ति हेतु सैनिक, सामन्त व शासक के रुप में हमारे समाज का तीन वर्गो में विभाजन हुआ । जब उस आवश्यकता की पूर्ति करने का उत्तरदायित्व हमारे पर नहीं रहा तो ये वर्गीकरण समाज के लिये एक बोझ बन गया । रियासतों के विलीनीकरण व जागीरदारी की समाप्ति पर लोगों ने यह कल्पना की थी कि अब हमारा यह वर्गवाद समाप्त होगा व समस्त समाज आसानी से एक सूत्र में आबद्ध हो सकेगा ।

लेकिन आज हम देख रहे हैं कि जिन्होंने श्रम से अथवा येन-केन प्रकारेण धन का संचय कर लिया है, उन लोगों का फिर एक नवीन वर्ग बन गया है । यह वर्ग भी अपने आपको समाज में विशिष्ट समझने, कुरुतियों को अपनाने व प्रोत्साहित करने व सामाजिक परम्पराओं को तिलांजलि देने में उन वर्गों से पिछे नहीं है जो पहले अपने आपको विशिष्ठ समझा करते थे ।

दुसरा एक वर्ग उस शिक्षित समाज का बन गया है, जिसकी आर्थिक स्थिति मध्यम श्रेणी की है । यह वर्ग अपने अल्प शिक्षा ( आधुनिक शिक्षा ) के बल पर अपने आपको बहुत बुद्धिमान, चतुर व विवेकशील समझने लगा है, जबकि धर्म, इतिहास व कर्तव्य का बोध उन्हें अपने अनपढ़ पूर्वजों के समान भी नही है ।

तीसरा वर्ग उन सामान्य शिक्षित लोगों का है जिनकी आर्थिक स्थिति निम्न व मध्यम है श्रेणी के बीच में आती है । इन लोगों में अपनी परम्पराओं का निर्वाह करने की रुचिः, इतिहास की खोज के प्रति जागृति व चरित्र-निर्माण की अभिलाषा प्रायः देखी जा सकती है । साधनों के अभाव व परिस्थितियों की विपरीतता के बावजूद इस वर्ग में कुछ कर गुजरने की जीवंत चेष्टा के दर्शन होते है ।

चौथा वर्ग उन परिस्थितियों से पीङित लोगों का है । जिन्होंने कुसंगति व कुसंस्कारों से पीङित होकर अपनी आर्थिक स्थिति को बिगाड़ लिया है । शराब में फँसना, दुर्व्यसनों में फँसना, कुसंगति व आपराधिक कृत्य इस वर्ग के प्रमुख लक्षण है जो इस वर्ग को समाज से अलग-थलग करने के लिये पर्याप्त प्रतीत हो रहे है ।

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