कीड़ों की बग़ावत और फिर उनकी समाप्ति :-
मित्रों गर्मी का मौसम है .... देव भास्कर अपने प्रचंड रूप मे अपनी ताप बिखेर रहे है , ज़ाहिर सी बात है सामान्य जनजीवन इससे बेहाल हो जाता है .... लेकिन सबसे ज़्यादा अगर किसी को दिक्कत होती है तो उन कीड़ों को जो नाली मे पनपते है , कारण स्पष्ट है गर्मी से नालीयाँ सुखती है तो यह ‘
देव भास्कर को देखकर ‘ असहिष्णता’ का विधवा विलाप करते है , यह अभिव्यक्ति के आज़ादी की बात करेंगे ...... उन हर मुद्दों पे बात करेंगे जिनका अस्तित्व नाली से ही शुरू होता है और नाली पर ही ख़त्म होगा ..... इन्हें इंतज़ार उन तरलरूपी ( मुद्रा) गन्दगी की होगी जो इन्हें निरंतर श्वास प्रदान करता रहता है .....
कुछ ऐसा ही हाल आज लुटियंश पत्तलकार , सो काल्ड सेकुल्यर, वामपंथी और कम्युनिस्ट सोच वालों का भी है .... भारत मे उदित हिंदुत्व के नवीन भास्कर की ताप को यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे , सो विधवा विलाप चालू है ...... इनके हिसाब से भारत मे अगर कोई क्रूर भाव है तो वो हिन्दुत्व ही है , अफ़सोस इन कीड़ों ने कभी ‘ सर्वजन सुखाय , सर्वजन हिताय’ के सनातनी अपदेशो पर अध्ययन नहीं किया ..... सच कहूँ तो भारत इनलोगो के लिये कभी इनका अपना देश रहा ही नहीं , यह तो पैसा कमाने और नफ़रत फैलाने का एकमात्र साधन था इनके लिये ......लालच और विकृत कुण्ठाएँ इन पर इस क़दर हावी रही कि हिन्दूत्व के प्रहरियों को उनको ,उनके देश और अधिकार से वंचित रखा जो असल मे उसके असली हक़दार थे ..... यह वो वित्तपोषित आवारा औलाद थे ,जो अपने तथाकथित विदेशी बापों , चर्च व वो कुण्ठित लोग जो भारत की सफलता से निरंतर जलते रहते थे , उनके आदेश पर देश को जात मे बाटते थे , भारत को तोड़ने की शाजीश करते थे और हर वो क़दम अपनाते थे जिससे मॉ भारती के छाती पर नासूर पैदा कर सके .....
ना जाने कितने सालो से इनके यह घृणित मनसूबे फलफूल रहे थे , लेकिन हिन्दुत्व के सूर्य के ताप से इनकी बनायी नालियाँ आज सूख रही .... यह बिलबिला रहे , और यकिन करिये इनकी बिलबिलाहट जरूरी है .... अब सिर्फ एक क़दम और ....कीटनाशक छिड़किये और इनके अस्तित्व को सदैव के लिये समाप्त करे और साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि इनके वो बाप जो इन पर गन्दगी बहा कर इन्हें जीवित करते रहे है उनपर पूर्णता लगाम लगायी जाये
यह देश स्वामी विवेकानंद का है , यहाँ लेनिन और कार्ल मार्क्स नहीं चलेंगे ..... जय हिन्द , जय माँ भारती 🙏🏻
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