नादिरशाह ने आदेश दिया, कि दिल्ली के सारे बाशिंदे मुंह खोल कर सड़क पर खड़े हो जाएं, ताकि मेरे सैनिक जिसके चाहे उसके मुंह में थूक सके... जलियावाला बाग हत्या कांड के तीन दिन बाद अमृतसर की गलियों में हम पेट के बल रगड़ रगड़ कर चलने को विवश थे, क्योंकि अंग्रेज सरकार बताना चाहती थी कि हमारी क्या औकात है ?
नादिरशाह ने आदेश दिया,
कि दिल्ली के सारे बाशिंदे मुंह खोल कर सड़क पर खड़े हो जाएं, ताकि मेरे सैनिक जिसके चाहे उसके मुंह में थूक सके...
जलियावाला बाग हत्या कांड के तीन दिन बाद अमृतसर की गलियों में हम पेट के बल रगड़ रगड़ कर चलने को विवश थे, क्योंकि अंग्रेज सरकार बताना चाहती थी कि हमारी क्या औकात है ?
गुरू पुत्रों के अंतिम संस्कार के लिए मुगलों से हम अपनी ही भूमि का हिस्सा सोने के सिक्के बिछा कर खरीद रहे थे...
और तैमूर हमारे सिरों के पहाड़ खड़े कर रहा था, ताकि जब वो हरिद्वार नष्ट करके वापस लौटे तो उसे दिल्ली का रास्ता याद रहे...
खिलजी ने नालंदा जलाकर खाक कर दिया, ताकि भविष्य में हमें ये पढ़ाया जा सके कि भारत सपेरों, मदारियों का देश है...
ये सब हुआ, क्योंकि हमने व्यक्तिगत स्वार्थ को सदैव राष्ट्र से ऊपर रखा... कोई ना कोई वहां हमेशा मौजूद था मुखबरी करने के लिए, किले का दरवाजा खोलने के लिए, युद्ध के बीच में पाला बदल लेने के लिए...
जिन्होंने देश को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखा वो अपने नाम के आगे आज भी ग्रेट लगाते हैं... उनकी रानी आज भी अपने सिर पर हमारा यहां से लूटा गया कोहिनूर से जड़ा ताज पहनती है...
चुनाव है.
आपको तय करना है कि फिर किले के दरवाजे पीछे से खोलने हैं या नहीं...
बटन दबाने से पहले एक बार भारत माता की जय बोल देना, उँगली खुद ही कमल के बटन पर टिकेगी।
Comments
Post a Comment