संभावनायें ------------ इधर चुनाव चल रहे हैं और उधर वामपंथियों ने 23 के बाद कोर्ट से मोदी को हटाने की प्लानिंग कर रखी है। यही कारण था कि CJI पर यौन उत्पीड़न वाला दबाव बनाया गया, ठीक उसी तरह जैसे इससे पूर्व वाले CJI पर महाभियोग वाला दबाव बनाया गया था। निर्णयपालिका को अपने इशारों पर हमेशा से ही चलाने की कोशिश रही है। पहले कैसे चलती थी या नहीं लेकिन मोदी सरकार आने के बाद तो जिस तरह कोर्ट फिक्सर एक्टिव हुए हैं, वो नीचता की हर हरकत पार कर रहे हैं।
संभावनायें
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इधर चुनाव चल रहे हैं और उधर वामपंथियों ने 23 के बाद कोर्ट से मोदी को हटाने की प्लानिंग कर रखी है।
यही कारण था कि CJI पर यौन उत्पीड़न वाला दबाव बनाया गया, ठीक उसी तरह जैसे इससे पूर्व वाले CJI पर महाभियोग वाला दबाव बनाया गया था।
निर्णयपालिका को अपने इशारों पर हमेशा से ही चलाने की कोशिश रही है। पहले कैसे चलती थी या नहीं लेकिन मोदी सरकार आने के बाद तो जिस तरह कोर्ट फिक्सर एक्टिव हुए हैं, वो नीचता की हर हरकत पार कर रहे हैं।
यही वजह है कि इस बार CJI छुट्टियों में खुद सुनवाई कर रहे हैं और यदि आप तिथियों पर ध्यान दें तो वो 23 के बाद अगले लगभग 10 दिन तक कोर्ट सुनेंगे।
अब देखना ही कि कोर्ट इनके आगे झुकता है या CJI ने इनको जवाब देने के लिए ही अपनी छुट्टियों को कैंसिल करकर 23 मई के बाद वाली बेंच ली हैं क्योंकि वामपंथियों की पूरी कोशिश है कि किसी तरह यदि मोदी सरकार 272 से नीचे रहे तो कोर्ट के जरिये कुछ ऐसा फैसला आये कि सरकार बनाने को दूसरों को कहा जाय या फिर EVM या धांधली का बहाना बनाकर किसी तरह की जांच का आदेश दिया जाय और मोदी को पद से दूर रखा जाए।
हालांकि ऐसी जांच वो कबसे राफेल पर भी चाहते हैं लेकिन सबूत न होने के कारण जब कोर्ट इसपर कोई फैसला नही दे पा रहा तो वो कोर्ट को ही डरा रहे हैं। उनका सीधा मकसद है कि मोदी पर आरोप लगाकर उन्हें प्रधनमंत्री बनने से रोकना जैसा पाकिस्तान में नवाज शरीफ के साथ हुआ।
हालांकि कोर्ट भी चुनाव नतीजों का इन्तेजार कर रहा है ताकि वह तय कर सके कि उसे दबना है या आज़ाद रहना है। इसीलिए उसने राफेल की पुनः सुनवाई वाले फैसले से लेकर अन्य फैसलों को सुरक्षित रखा हुआ है।
वामपंथी जानते हैं कि यदि इस बार मोदी आया तो खेल खत्म. बहुत से मोदी विरोधी आपको पलटी मार इस खेमे में आते भी दिखेंगे। वैसे भी मोदी ने कहा है कि इस टर्म में मैंने इन्हें जमानत पर लाकर खड़ा किया है, अगली बार इन्हें जेल डाल दूंगा। कोर्ट से लेकर अधिकारी भी इसी हिचक में रहते हैं कि कहीं ये लोग वापिस आ गए तो उनका क्या होगा? इसलिए मोदी 2.0 होते ही वो भी खुलकर काम करेंगे। क्योंकि आजतक किसी को विश्वास नही कि इस गिरोह को कोई 5 साल से ज्यादा सत्ता से दूर रख सकता है।
और पिछली बार तो मोदी सरकार पीछे हट गई थी लेकिन इस बार ज्यूडिशियल रिफार्म होना पक्का है।।
ये 25-25 बार अग्रिम जमानत लेकर बाहर घूमने की अनुमति देने वाले जज भी नपेंगे।
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