मेरा अपना आंकलन है कि टीवी पर आने वाले एग्जिट पोल्स, वास्तविकता से परे होंगे इसलिये उसको लेकर 23 मई तक अपना समय खराब नही करना चाहिए।
मेरा जो इस चुनाव को लेकर जो अनुभव है, उसके आधार पर यह कह सकता हूँ कि आने वाले परिणाम अप्रत्याशित होंगे और विपक्ष इन परिणामो को 2014 की तरह, इस बार नम्रता से नही स्वीकार करेगा।
मुझे लगता है कि सम्पूर्ण विपक्ष को उनके विरुद्ध आने वाले इन परिणामो को लेकर अंदेशा हो गया है। यह जो 5वे व 6ठे चरण के बाद, चंद्रा बाबू नायडू की जो गणेश परिक्रमा हो रही है, उसका उद्देश्य, विपक्षी दलों द्वारा महागठबंधन बना कर विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री के नाम पर सहमति बनाने से ज्यादा, चुनाव परिणामो को लेकर चुनाव आयोग व सर्वोच्च न्यायालय में वैधानिक व न्यायिक उपद्रव करने की योजना को मूर्त रूप देने का प्रयास है।
मुझको ऐसा आभास हो रहा है कि मोदी जी को मत देने वालो का असली संघर्ष 23 मई 2019 के बाद होगा, जब शायद उन्हें विपक्ष के षणयंत्रों का प्रति उत्तर देने, स्वयं सामने आकर सड़क पर उतरना पड़ेगा।
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