मैं अब 2019 से 2024 के मध्य एक नए सशक्त भारत का निर्माण देख रहा हूँ। पिछले 5 साल में जो काम हुए हैं, उनका सकारात्मक असर 2022 से दिखने लगेगा। फिर 2024 की जीत और भी धमाकेदार होगी।
रविश कुमार या जो भी इनके टाइप के पत्तलकार-साहित्यकार-कवि-आर्टिस्ट झंडुबाम सिकुलर लोग हैं, जो 5 साल से मोदी जी को हराने की दुआ कर रहे थे, उन पर तंज कसने की बजाए अब ऐसे लोगों को छोड़ दिया जाना चाहिए। ये यूटोपियन लोग हैं, जो अपनी ही सपनों की दुनिया में जीते हैं। ये यथार्थ नहीं देखते, बस अपने पूर्वाग्रह से ग्रसित रोते रहते हैं।
मैं अब 2019 से 2024 के मध्य एक नए सशक्त भारत का निर्माण देख रहा हूँ। पिछले 5 साल में जो काम हुए हैं, उनका सकारात्मक असर 2022 से दिखने लगेगा। फिर 2024 की जीत और भी धमाकेदार होगी।
अब वक्त आ गया है कि भाजपा कश्मीर, केरल और बंगाल पर पूर्णतयः फोकस बढ़ाते जाए। आंध्र में भी स्थिति मजबूत किये जाने की जरूरत है। साथ ही बिहार में बहुत दिन छोटे भाई बन कर रह लिए। अब समय धीरे-धीरे बड़े भाई की भूमिका में आने का आ रहा है। बिहार को देश के सबसे पिछड़े राज्य के टैग से बाहर निकालने के लिए बेहद जरूरी है कि इसे क्षेत्रीय जातिवादी दलों के चंगुल से निकाला जाए।
उपेंद्र कुशवाहा जी को अब समझ आ रहा होगा कि क्यों रामविलास पासवान जी शानदार मौसम विज्ञानी समझे जाते हैं भारतीय राजनीति के। पटना हवाई अड्डे से दिल्ली जा रहे थे मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कुशवाहा जी। तो इनकी भी सामान्य तलाशी ली गयी। बस इतना किया गया कि इनको लाइन में इंतजार नहीं करवाया सुरक्षाकर्मियों ने भीतर। पर इनके अंदर जाते ही सीआईएसएफ का सब-इंस्पेक्टर धीमे से मुस्कुरा कर अपने साथी से बोला कि महीने दिन में साहब की सब गर्मी निकल गयी।
अब मैं सोच रहा कि तब तो सांसद भी थे, अब एयरपोर्ट पर कितनी इज्जत होगी पूर्व सांसद महोदय की। बड़ा चुनाव के नतीजों के बाद खून-खराबे की धमकी दे रहे थे। अब बैठ कर कहीं मुंह दाब सुबुक रहे होंगे कि किस घड़ी मोदी जी-शाह जी से बैर लिया।
जय श्रीराम..🙏🚩🙏🌷🙏
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