वोट डालने के पहले अपनी आँखे बंद कीजिये और आपके वोट से बनने वाले प्रधानमंत्री के गुणों के बारे में सोचिये…
वोट डालने के पहले अपनी आँखे बंद कीजिये और आपके वोट से बनने वाले प्रधानमंत्री के गुणों के बारे में सोचिये…
वर्ष 1955 में इज़रायली सेना के 21 वर्ष के लेफ्टिनेंट डानिएल कानमान (Daniel Kahneman) को सैनिकों की नियुक्ति के लिए एक सिस्टम विकसित करने को कहा गया। इज़राइल एक नया देश था और वहां के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की जिम्मेवारी सौंपी गयी थी। कानमान मनोविज्ञान में ग्रेजुएट थे और उस समय आर्मी में इस विषय में सबसे प्रशिक्षित थे। उनके बॉस ने रसायनशास्त्र पढ़ा था।
उस समय इज़रायली सेना में भर्ती के समय अन्तरज्ञान (intuition) का सहारा लिया जाता था। परीक्षार्थियों से कुछ प्रश्न पूछे जाते थे और फिर इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति अपनी सोच या अन्तर्ज्ञान के आधार पर कि यह व्यक्ति सेना के लिए उपयुक्त है या नहीं - निर्णय लेता था। लेकिन इस इंटरव्यू प्रणाली से निकले रिक्रूट बाद में आर्मी की अपेक्षा के अनुरूप नहीं निकल रहे थे।
कानमान ने इंटरव्यू की व्यवस्था को बदल दिया। उन्होंने 6 विशिष्ट गुणों को चुना, जैसे कि उत्तरदायित्व, मिलनसार, गौरव की भावना शामिल थे और उन्ही गुणों के अनुसार परीक्षार्थियों से उनके पिछले अनुभव या जीवन के बारे में तथ्यात्मक प्रश्न पूछना था। हर गुण को अलग-अलग जांचा जाएगा और फिर सबके अंक जोड़कर सैनिकों का सेलेक्शन किया जाएगा।
इंटरव्यू लेने वालों को यह नहीं देखना था कि कैंडिडेट आर्मी के लिए फिट है या नहीं। केवल उनके पिछले अनुभव और जीवन के बारे में तथ्य जुटाना था। कानमान के अनुसार इंटरव्यू की इस प्रक्रिया ने कैंडिडेट के बारे में पहली छाप (first impression) के आधार पे सेलेक्शन करने को समाप्त कर दिया।
लेकिन साक्षात्कारकर्ताओं ने विद्रोह कर दिया। वे अपनी राय को अधिक महत्त्व देते थे और तथ्यात्मक प्रश्न पूछना उनके लिए समय की बर्बादी थी।
कानमान ने समझौते के रूप में सुझाव दिया कि वे सब उनके कहे के अनुसार इंटरव्यू ले। उसके बाद अपनी आँखे बंद करे, रिक्रूट को एक सैनिक के रूप में सोचे और उन्हें एक से पांच के बीच में नंबर दे दे।
कुछ समय बाद परिणाम आये। कानमान पद्धति से चुने गए सैनिक उत्तम सिद्ध हुए। लेकिन मजे की बात यह थी कि आँख बंद कर के दिए गए अधिक नंबर वाले सैनिक भी खरे उतरे क्योकि दोनों प्रक्रिया वाले नम्बरों में समानता थी। कानमान ने निष्कर्ष निकाला कि तथ्यों की निष्पक्ष जांच के बाद हमारी राय और अन्तरज्ञान भी बदल जाता है।
45 वर्ष बाद अर्थशास्त्र में नोबेल प्राइज मिलने के बाद कानमान अपनी पुरानी आर्मी यूनिट में पुनः गए जो उस समय भी सैनिको का चयन करती थी। महिला कमांडिंग अफसर ने उन्हें बताया कि सैनिको का सेलेक्शन अभी भी कानमान पद्धति से होता है। सैनिको की रिपोर्ट से पता चलता था कि कानमान पद्धति से अच्छे रिक्रूट सेलेक्ट हो रहे थे। सेलेक्शन पद्धति के बारे में ब्रीफ करने के बाद कमांडिंग अफसर ने कहा: "और फिर हम उन्हें कहते है, 'अपनी आँखे बंद करो'।
भारत में भी इस समय यही स्थिति है।
हमें प्रधान सेवक का चुनाव करना है। मेरा सुझाव है कि कोई भी 6 विशिष्ट गुणों को चुन लें जैसे कि
#राष्ट्र_भक्ति (तथ्यात्मक प्रश्न: क्या कैंडिडेट ने पूर्व में वंदे मातरम् बोला था?);
#ईमानदारी (तथ्यात्मक प्रश्न: क्या कैंडिडेट ने पूर्व में भ्रष्टाचार किया था?);
#परिश्रमी (तथ्यात्मक प्रश्न: कैंडिडेट ने पूर्व में एक वर्ष में कितनी छुट्टिया ली या प्रतिदिन कितने घंटे काम करता था?);
#नेतृत्व_कौशल (क्या कैंडिडेट ने पूर्व में प्रोजेक्ट समय पे समाप्त किया? या पूर्व में किसी समुदाय विशेष की तरफ तुष्टिकरण की नीति अपनायी थी?);
#निर्भयता (कैंडिडेट का पूर्व में आतंकवाद, भारत तोड़क शक्तिया और आतंकी देश की तरफ क्या रूख था?)।
आप अपने मत के अनुसार विशिष्ट गुणों का चयन कर सकते है; लेकिन सभी कैंडिडेट को एक ही प्रकार के प्रश्नो की कसौटी पे परखना होगा।
नरेंद्र मोदी, ममता, मायावती, अखिलेश, चंद्रबाबू, राहुल, प्रियंका आपके समक्ष प्रधान सेवक के कैंडिडेट है।
इन सब को अपने चुने हुए विशिष्ट गुणों के आधार पे परखिये। इसके बाद अपनी आँखे बंद कीजिये।
#आपको_जवाब_मिल_जाएगा
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