तेरा गौरव अमर रहे माँ पीएम मोदी ने जिस औरत के छुए थे पांव, उनके आगे इंग्लैंड को भी टेकने पड़े थे घुटने अन्नपूर्णा की ही देन है जो आज दुनिया भर के हर 'बेबी फ़ूड' पर लिखा होता है कि 'मां का दूध बच्चे के लिए सबसे उपर्युक्त आहार है'.
तेरा गौरव अमर रहे माँ
पीएम मोदी ने जिस औरत के छुए थे पांव, उनके आगे इंग्लैंड को भी टेकने पड़े थे घुटने
अन्नपूर्णा की ही देन है जो आज दुनिया भर के हर 'बेबी फ़ूड' पर लिखा होता है कि 'मां का दूध बच्चे के लिए सबसे उपर्युक्त आहार है'.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते शुक्रवार को वाराणसी लोकसभा सीट से परचा दाखिल करने के बाद जिन अन्नपूर्णा शुक्ला के पांव छुए थे, उन्होंने ही इंग्लैंड को भी झुकने के लिए मजबूर कर दिया था. अन्नपूर्णा की ही देन है कि आज दुनिया भर के हर 'बेबी फ़ूड' पर लिखा होता है कि 'मां का दूध बच्चे के लिए सबसे उपर्युक्त आहार है'. अन्नपूर्णा वाराणसी लोकसभा सीट पर 2019 के चुनावों के लिए इस बार पीएम मोदी की चार प्रस्तावकों में से एक हैं.
WHO ने मानी थी अन्नपूर्णा की बात
आपने अक्सर बेबी फ़ूड प्रोडक्ट्स पर लिखा देखा होगा कि, 'मां का दूध नवजात के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि यह बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है.' खासकर बच्चों के लिए आने वाले दूध के पाउडर के डब्बों पर ये ज़रूर लिखा रहता है. अन्नपूर्णा शुक्ला ने ही अपनी रिसर्च में पाया था कि मां के दूध से बेहतर नवजात बच्चों के लिए कुछ भी नहीं है. इस रिसर्च के सामने आने के बाद ब्रिटेन की सबसे बड़ी बेबी फूड कंपनी ने इस बात को अपने हर प्रोडक्ट की पैकेजिंग के साथ छापना शुरू किया था.
अन्नपूर्णा की रिसर्च को ध्यान में रखकर ही WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) ने नवजात के लिए छह महीनों तक मां का दूध ज़रूरी करार दिया था. उनकी ये रिसर्च साल 1969-72 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुई थी. ये उनकी पीएचडी का रिसर्च टॉपिक भी था. अन्नपूर्णा बताती हैं कि हमने पाया था कि जो लोग नवजात के स्तनपान पर ध्यान नहीं दे रहे थे उनके बच्चे ओवरवेट और कम एक्टिव थे. इन रिसर्च के बाद कुछ बेबी फ़ूड कंपनियों ने तो ये मैसेज छापने पर सहमति दे दी थी लेकिन कुछ ऐसा करने पर ऐतराज जाता रहे थे जिन्हें WHO के निर्देशों के बाद ऐसा करना पड़ा था.
Jai ma bhaarti !! NaMoAgAiN!!!
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