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🤔मुख्य न्यायाधीश गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप: सर्वोच्च न्यायलय की गरिमा फिर कलुषित हुई
आखिर, असम के भूतपूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री गोगोई के पुत्र व वर्तमान में भारत की सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी, यौन शोषण व उत्पीड़न के आरोपों के घेरे में आकर, कांग्रेसी चरित्र के असली द्योतक निकले।
मुख्य न्यायाधीश गोगोई के विरुद्ध एक 35 वर्षीय महिला ने जो पहले सर्वोच्च न्यायालय में कनिष्ठ कोर्ट सहायक के पद पर कार्यरत थी ने आरोप लगाया है कि मुख्यन्यायाधीश ने 10 अक्टूबर व 11 अक्टूबर 2018 को अपने निवास स्थान में, उसका यौन शोषण करने का प्रयास किया था। इस महिला ने अपने आरोपो का शपथपत्र न्यायालय के सभी 22 न्यायाधीशों को भी भेज दिया है।
आरोपी महिला में अपने शपथपत्र में बताया है कि “उन्होंने(मुख्यन्यायाधीश रंजन गोगोई) मुझे मेरी कमर से पकड़ लिया और मेरे पूरे शरीर को छुआ। फिर अपने शरीर को मेरे ऊपर डाल कर मेरे शरीर को दबाया। मैंने छूटने की कोशिश की लेकिन उन्होंने, अपनी गिरफ्त से मुझको छूटने नही दिया। उन्होंने मुझसे, उनको पकड़ने को कहा लेकिन मैं जड़वत हो गयी और अपने शरीर को उनसे दूर रखने का प्रयास करती रही।"
आगे पीड़िता कहती है कि उसके द्वारा इनकार किये जाने के बाद वह उनके निवास के ऑफिस से हट गई, जहां वह अगस्त 2018 से नियुक्त थी। इस घटना के 2 माह के बाद उसको, 3 आरोप लगाते हुए, 21 दिसम्बर को नौकरी से निकल दिया गया, जिसमे एक आरोप था की बिना पूर्व अनुमति के 1 दिन का आकस्मिक अवकाश लिया था।
यही नही इसके बाद उसके परिवार को भी पीड़ित किया गया। उस के पति और बहनोई जो दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल है, उनको 28 दिसम्बर 2018 को 2012 के ऐसे केस में निलंबित कर दिया गया, जिसमे समझौता हो चुका था।
उसके बाद 11 जनवरी 2019 को पुलिस वाले उसको मुख्यन्यायाधीश के निवास पर ले गये, जहां मुख्यन्यायाधीश की पत्नी ने उसको जमीन पर बैठ कर नाक रगड़ कर माफी मांगने को कहा। उसने, यह न जानते हुए की किस बात की उससे माफी मंगवाई जारही है, उसने वह सब किया, जो उससे कहा गया था।
उसके द्वारा माफी मांगने के बाद भी उसके देवर, जो दिव्यांग है और सर्वोच्च न्यायालय में अस्थायी रूप से 9 अक्टूबर 2018 से कनिष्ठ कोर्ट अटेंडेंट के पद पर कार्यरत था, उसकी नौकरी, बिना कारण बताए, 14 जनवरी 2019 को समाप्त कर दी गयी।
पीड़िता का आरोप है कि उसके विरुद्ध प्रताड़ना सिर्फ यहीं तक नही रुकी, उसके बाद 9 मॉर्च 2019 को दिल्ली की पुलिस राजस्थान में उनके पुश्तेनी घर से उसको और उसके पति को, एक फ़र्ज़ी केस में लेने पहुंच गई। उसको अपने पति, देवर, देवरानी और एक रिश्तेदार के साथ तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में रोके रक्खा गया और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी हई। उनके हाथ पैर बांध कर, बिना खाने पानी के 24 घण्टे थाने में बन्द रक्खा गया। पीड़िता ने अपने शपथपत्र के साथ थाने का वीडियो भी संलग्न किया है।
मैं मानता हूँ कि भारत के मुख्यन्यायाधीश गोगोई के विरुद्ध, आरोपी महिला के यौन उत्पीड़न के साथ, उसके परिवार को पुलिस द्वारा प्रताड़ित किये जाने के आरोप इतने गम्भीर है कि प्रथमदृष्टया इनकी अवेहलना नही की जासकती है। इन परिस्थितियों में, न्यायालय व उसमे बैठे न्यायाधीशों की नित्य गिरती गरिमा को और रसातल तक पहुंचाने के अपराध से बचने के लिए, जब तक पूरे मामले की विवेचना नही हो जाती, भारत के मुख्यन्यायाधीश न्यायमूर्ति गोगोई को, अविलंब छुट्टी पर चला जाना चाहिए।
यदि ऐसा नही करते है तो राष्ट्रपति को अपने अधिकारों का प्रयोग कर के या तो गोगोई को विवेचना तक छुट्टी पर जाने की या फिर पद की गरिमा को प्रतिस्थापित करने के लिए, समय पूर्व स्वेच्छा से सेवानिवर्त ले लेने की सलाह देनी चाहिये।
मैं समझता हूँ कि भारत की जनता के सामने आज न्यायालपालिका जिस तरह नग्न खड़ी है, उसमे किसी भी आरोप के सत्य होने की संभावना से इनकार नही किया जासकता है।
"ठाकुर की कलम से"
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