1965 का युद्ध और 2019 का चुनाव कलकत्ते के एक सम्पन्न परिवार में एक बच्चा पैदा हुआ, नाम रखा गया जयंतो नाथ चौधरी। परिवार के अंग्रेजी सरकार से मधुर संबंध थे तो बच्चा जवान होते ही अंग्रेजी सेना में असफर बन गया। दूसरे विश्व युद्ध में बाहर गया पर कोई बड़ा दायित्व निभाए बिना प्रोमोशन पाता गया। भारत स्वतंत्र हुआ तो हैदराबाद के विलय में कोई विशेष योगदान न होते हुए भी इन्हें ही रजाकारों की सेना के आत्मसमर्पण कार्यक्रम का नेतृत्व मिला। संयोगवश तबतक ये भारतीय सेना के तीसरे सर्वोच्च अधिकारी(मेजर जनरल) बन चुके थे।
1965 का युद्ध और 2019 का चुनाव
कलकत्ते के एक सम्पन्न परिवार में एक बच्चा पैदा हुआ, नाम रखा गया जयंतो नाथ चौधरी। परिवार के अंग्रेजी सरकार से मधुर संबंध थे तो बच्चा जवान होते ही अंग्रेजी सेना में असफर बन गया। दूसरे विश्व युद्ध में बाहर गया पर कोई बड़ा दायित्व निभाए बिना प्रोमोशन पाता गया। भारत स्वतंत्र हुआ तो हैदराबाद के विलय में कोई विशेष योगदान न होते हुए भी इन्हें ही रजाकारों की सेना के आत्मसमर्पण कार्यक्रम का नेतृत्व मिला। संयोगवश तबतक ये भारतीय सेना के तीसरे सर्वोच्च अधिकारी(मेजर जनरल) बन चुके थे।
1965 के भारत पाक युद्ध के समय ये भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष थे और यही देश का दुर्भाग्य था। तत्कालीन रक्षामंत्री यशवंतराव चव्हाण ने अपनी डायरी में इनकी दुर्दशा लिखी है। जब युद्ध चल रहा था तो किसी भी सूचना पर ये डर जाते थे और रुआँसे होकर रक्षामंत्री के कार्यालय में सोफे पर पसर जाते थे। चव्हाण के बार बार जोश दिलाने पर भी वे मोर्चे पर जाने के लिए तैयार नहीं होते थे। R D प्रधान उस समय रक्षामंत्री के सचिव थे और उन्होंने अपनी पुस्तक में विस्तार से ऐसी अनेक घटनाओं का वर्णन किया है।
जब भारतीय सेना लाहौर व स्यालकोट पर कब्जा करने को बढ़ रही थी तो चौधरी ने नोट लिखा कि हमे हाथी की तरह सतर्क होकर धीरे-धीरे कदम बढ़ाना चाहिए। इसी आदेश के कारण सेना का अभियान मंद पड़ गया और लाहौर हाथ में आता आता रहा गया। 22 दिनों का भीषण युद्ध सितंबर 1965 में अपने भीषणतम रूप में लड़ा गया।
इसके बन्द होने में संयुक्त राष्ट्र का भी प्रमुख योगदान है पर इसमें जयंतो नाथ चौधरी की एक और मूर्खता और कायरतापूर्ण हरकत भी शामिल है। 20 सितंबर को जब रक्षामंत्री चव्हाण और प्रधानमंत्री शास्त्री जी ने उनसे पूछा कि हमारे पास कितनी युद्ध सामग्री है तो इसके उत्तर में चौधरी ने झूठ बोला कि हमारा 80% गोला बारूद का भंडार समाप्त हो चुका है। सत्य इसके ठीक विपरीत था, भारत ने अपनी भंडारण क्षमता का 14% मात्र उपयोग किया था जबकि पाकिस्तान का 80% से अधिक गोला बारूद उपयोग हो चुका था तथा काफी कुछ हमारे हमलों में भी नष्ट हुआ था।
उच्च पदों पर मूर्ख के होने से शौर्य और शक्ति का कितना नुकसान होता है इसका एक अनूठा उदाहरण हैं जयंतो चौधरी। लाहौर हाथ से निकल गया, अमेरिकी पैटन टैंकों और सेबर जेट विमानों को धूल चटाने के बाद भी हम जीत का वह स्वाद नही ले पाए।
आज "ठाकुर" यह कथा इसलिए सुना रहा है क्योंकि देश में चुनाव होने वाले हैं। कहीं आपके एक वोट से ऐसा मूर्ख न जीत जाए जो राजनीति का जयंतो पप्पू चौधरी बन जाए। सतर्क रहें और मोदी को ही हर सीट पर जिताएँ। सम्पन्न परिवार से होना भर योग्यता नही होती याद रखें।
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