सुना है कि मोमता दी को सूबूत चाहिये, ताकि अपने रिश्तेदारो का फातिहा पढ सके......? भारत मे बैठे पाकिस्तानी स्लीपर cells active हो गए हैं और जैसे इन्होंने Surgical Strike पे सवाल उठाए थे वैसे ही याब इस Air Strike पे उठा रहे हैं ।
मोमता दी क्या जानें Avionics और Weapon systems के बारे मे ??? तो इस गूढ विषय को थोडा तसल्लीबख्श तरीके से बयान करना होगा ....... तो मितरों , पेशे खिदमत है ,हमारे जंगी तैय्यारो (लडाकू जहाज ) और उनकी #अस्करी_कुव्वत यानि Military might की तफ्सीलात ....
Mirage-2000 ने बालाकोट, मुजफ्फराबाद और चकोटी नामक तीन स्थानो को टारगेट किया था। जिनमे बालाकोट , #चकोटी से 73 किमी दूर है। जबकि मुजफ्फराबाद से बालाकोट की दूरी है 40 किलोमीटर , चकोटी से मुजफ्फराबाद 56 किलोमीटर दूर है। .................
#सूबूत नंबर -१ ....
BBC उर्दू , द्वारा जारी किये गये, वीडियो मे बालाकोट का स्थानीय निवासी पाँच धमाके सुनने का दावा कर रहा है। तो जाहिर है, कि बालाकोट के #जैश ट्रैनिंग कैंप पर पाँच बम गिराये गये थे। तीनो स्थानो के बीच की दूरी इतनी ज्यादा है ,कि एक स्थान पर गिराये गये बम के धमाके की आवाज , दूसरी जगह सुनाई नही देगी ......तो साबित होता है कि केवल #बालाकोट के कैम्प पर पाँच बम गिराये गये थे। ..........
#सूबूत नंबर -२ ....
अब ये भी जानना जरूरी है कि , आखिर गिराया क्या गया था ?? उस Weapon system ,उसके Delivery method , उसकी #Accuracy और Target Destruction की कैपिबिलिटी के बारे मे भी जानना जरूरी है। .......
मोहतरमा, आपके बताना चाहूँगा कि आपके #रिश्तेदारो पर जो बम गिराये गये थे , उनको BGL-1000 के नाम से जाना जाता है। ये एक Laser guided bomb होता है। मिराज-२००० मे तीन किस्म के लेजर गाईडिड बम लगाये जा सकते है , बम का नाम उसका वजन बताता है, जैसे BGL-250, BGL-400 और BGL-1000......क्रमश: 250 kg, 400kg और 1000 kg वजन के होते है। ...........
इन बमो को 1978 मे #Matra कंपनी (वर्तमान मे MBDA कंपनी द्वारा विकसित किया गया था। ये बम अपनी ताकत , मैकेनिज्म और तबाही मचाने की क्षमता मे हूबहू अपने अमेरिकी समकक्ष Paveway Guided Bomb की तरह ही होते है। तथा Free fall यानि अपने वजन से टारगेट पर गिरते है।....
बम के जहाज से अलग होने, मतलब (Jettison) होते ही , Semi -Active Laser homing guidance system [SALH] के द्वारा ये बम अपने लक्ष्य पर पहुँचने के लिए निर्देशित होते है। बम की Nose पर लगा सेंसर ,ये काम करता है।
बम को टारगेट पर पहुँचने के लिए निर्देशित करने वाली प्रणाली ,जहाज पर लगी होती है , जिसे ATLIS-2 यानि ( Automatic Tracking Laser illumination system कहा जाता है। दरअसल ये सिस्टम बेहद तेज रोशनी वाली लेजर बीम को टारगेट पर छोडता है, जिससे टारगेट रोशनी मे नहा जाता है, और बम का सेंसर ,लेजर बीम का पीछा करते हुए एकदम सटीक तरीके से वही गिराता है , जहाँ लेजर बीम गिरती है ।..........
ATLIS -2 के जरिये बम को निर्देशित करने वाली बीम , किसी दूसरे एयक्राफ्ट , ड्रोन , से भी छोडी जा सकती है। इसके अलावा ,युद्ध के समय अपनी पैदल फौज के द्वारा जमीन पर स्थित Ground based Laser Designator targeting pod द्वारा भी लक्ष्य को चिन्हित करके उस पर सटीकता से ये बम यानि BGL -1000 गिराया जा सकता है।.....
अब आते है बम की सटीकता यानि Accuracy पर ..........
चूँकि ये लेजर गाईडिड बम है, इसे मध्यम उँचाई तथा नीची उडान भरते हुए , दोनो ही स्थिति मे उतनी ही सटीकता से गिराया जा सकता है।।
Accuracy के मामले मे , BGL-1000 दुनिया का सबसे अचूक बम है, यदि बम को लक्ष्य से 10 किलोमीटर दूर से भी छोडा जाता है, तो ये बम लेजर की रोशनी का पीछा करते हुए , पाँच मीटर के दायरे मे गिरता है। सूरज पश्चिम से निकल सकता है, मगर BGL -1000 का निशाना कभी चूक ही नही सकता।
बालाकोट मे , यदि पाँच BGL-1000 बम गिरे है, जो अपनी अचूकता के लिए प्रसिद्ध है, तो आप टारगेट पर मची तबाही का अंदाजा लगा सकती है। मतलब ये है , कि आपके भाई लोग , सीधे "हूरो के हरम " मे जाकर शिफ्ट हुए है ।
ऐसा ही कुछ नजारा , मुजफ्फराबाद और चकोटी वाले मदरसो यानि ट्रैनिंग कैंपो का भी रहा है। यकीन मानिये , वहाँ मौजूद आपके भाई जान भी फिलहाल हूरो की गोद मे बैठे है। .....
लीजिए, अब दीदार करिये , BGL-1000 का जिसने आपके भाई बंधुओ को जन्नत बख्शी है ।
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