डियर गरीबो के हितों के रखवालों,
आप जो आरक्षण लेकर या सिफारिश करवाकर सरकारी नौकरियों में बैठकर, या राजनीतिक पार्टियों के चम्मच बनकर अडानी, अम्बानी करते हो ना दिन भर की उन्होंने देश को लूट लिया है, तो कभी उनसे पूछिये जो लाखो लोग उनके साथ काम करते है या फिर उनकी कंपनियों में काम करते है।
बड़े बड़े योद्धा उनकी कम्पनियों में आने के लिये तड़पते है।
ब्राण्ड है वो
लोग सोचते है एक बार उनकी कंपनी का ठपा लगे तो उसके बाद विदेश में भी कमाएंगे की रिलाइंस में काम किया है अडानी में किया है ।
काम की इज़्ज़त है उधर जाति धर्म की नही जो काम करेगा लाखो कमायेगा।
सरकारी महकमों के जैसे ऑफिस होते है उनसे अच्छे तो टॉयलेट बने है उधर।
कर्मचारियों को इंसेंटिव से लेकर पार्टी करना घूमना सब करते है वे अपने एम्प्लॉय के लिये और जिन फौजियों को आप सिर्फ फेसबुक पर सम्मान देते हो और रियल लाइफ में मेंटल सोचते हो
उन्हें ये सम्मान से फ़ौज से ज्यादा पेमेंट देते है और आम सिविलियन से अलग फैशिलीटी ।
उन्होंने खुद को साबित किया है कि हम ये कर सकते है लोन दो उतार भी सकते है।
आप बिना सिक्योरिटी जमा किये लोन लेकर दिखाइए।
आज भी इतना पैसा है उनके पास की 7 पीढ़ियों को कोई दिक्कत नही।
लेकिन वे इस लेवल पर है कि ये सोचते है कि हम कितना रोजगार या अपने एम्प्लॉय बना सकते है।
देश को बिज़नेस मैन नही लूटता।देश को लूटते है वे नाकाबिल लोग जो समर्थ न होते हुए नौकरियों में बैठते है रिश्वत लेते है।और हड़तालें करते है।देश को लूटते है नेता और उनके चमचे जो बिना बिजनेस के करोड़पति बने बैठे है।
अगर आप अपने परिवार के अलावा काम देकर किसी का परिवार चलाते है तो वो देश लूटना नही बल्कि देश और देश के लोगो के लिये काम करना होता है।सोच बदलिये देश भी बदलेगा और सेकुलरों तुम्हे तो हम कूट कूट के बदल लेंगे
जयहिन्द
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