सुना है आजकल टोटीचोर अखिलेश यादव को बेरोजगारों की बहुत चिंता होने लगी है।
आपको बता दूँ यूपी में सपा या बसपा जब भी चुनकर आती थी, पिछली सरकार की सभी भर्तियों को निरस्त कर के नई भर्तियां निकाली जाती थी, जिनपर आवेदन तो सभी वर्ग के लोग करते थे, पर नौकरी कुछ विशेष धर्म और विशेष जात वालों को दी जाती थी।
आम बेरोजगार का इस तरह दो बार पैसा बर्बाद होता था। एक बार तब जब सरकार जाने से पहले आवेदन किया और भर्ती कैंसिल हो गयी, दूसरे तब जब आवेदन किया, नंबर पाए और उसकी सीट किसी फेल को दे दी गयी।
ऐसा दोनों ने किया है, मुस्लिम प्रायोरिटी रहते थे दोनों के लिए बाकी सपा के लिए अपना वोट बैंक और बसपा के लिए अपना वोटबैंक प्रायोरिटी रहता था, बाकी सब जाएं तेल लेने...
अभी जबसे भाजपा सरकार आयी है यूपी में, तब से इस नियम में बदलाव आया है, योगी जी ने पिछली कोई भी भर्ती को निरस्त नही किया है, पुराने आवेदन भी निरस्त नही किये गए हैं, 2015, 2016 में सपा सरकार द्वारा निकाली गई भर्तियों पर अब परीक्षा करवाकर भर्ती की जा रही है, वो भी बिना किसी दंद-फंद के। प्रायोरिटी केवल योग्य व्यक्ति को दी जाती है, उपनाम और टोपी वालों को नही।
तो जो ये बेरोजगारी-बेरोजगारी चिल्ला रहे हैं, ये अभी 2 वर्षों में नही आई है, इसके लिए सपा-बसपा ने पिछले 10-15 सालों में बहुत मेहनत की है, जिसका अंजाम आज यूपी के होनहार छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
भूल में मत रहें, ये न सुधरे थे न सुधरेंगे, इसलिए अपना वोट सोच समझकर ऐसे व्यक्ति को दें, जो आपके वोट की अहमियत समझता हो, आपका वोट लेकर आपके लिए काम करता हो, न कि आपका वोट लेकर दूसरों के लिए काम करता हो।
#Namo_Again
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