यही तो था... वक्त है बदलाव का...

यही तो था... वक्त है बदलाव का...
राजस्थान सरकार ने कुम्भलगढ़ किले में नमाज पढ़ने की इजाजत दी है

जिस किले में हमेशा जय एकलिंगनाथ, हर हर महादेव, जय भवानी का जयघोष होता था, वहा पर अब मलेच्छों के द्वारा अल्ला हु अकबर के साथ नमाज होगी।

अगर ये नमाज कुम्भलगढ़ किले हुई तो सभी हिन्दू व राजपूत संगठनो को ड़ूब मरना चाहिए।

जिस किले में हमेशा भगवा ध्वज लहराया है। जिस किले की सुरक्षा स्वतंत्रता व स्वभिमान की रक्षा के लिए लाखो शीश कट गये और करोड़ों मलेच्छो के सर काट दिए गए, वहां नामाज़??

आज बप्पा रावल, राणा कुम्भा, राणा सांगा, माहाराणा प्रताप की आत्मा भी रो रही होगी कि हमने किन निर्लजो के लिये कष्ट सहे, किन कायरों के लिये हम अपने स्वभिमान के लिये चैन और सुख को त्याग कर बलिदान हुये।

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