वैश्विक बाजार के कारण सिमटता देशी बाजार

जिस देश के लोग अपने देश में रोटी भी बनाना नहीं जानते,,,
उस देश के लोग आज मैदे की सड़ी गली कुछ गिनी चुनी चीज़े बनाकर भारत जैसे देश में बेचकर अरबो रुपय कमाकर अपने देश ले जाते है।

   पूरे विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहां आप जब तक जीवित हैं तब तक रोज़ एक नई चीज़ खा सकते है उसके बाद भी यह चीज़े खत्म नही होगी।

कितनी तरह मिठाईया व पकवान, इसके अलावा हर राज्य व अपने अपने क्षेत्र की मशहूर अलग अलग मिठाई व खुशबू - पेड़ा, पेठा, खुरमा, बालूशाही, गट्टा, रसभरी, गुलबन्द, अफलातून, कई प्रकार के हलवा, गुलाब जामुन, आदि भी मिलते हैं।

  यूरोपीय देशों में ले देकर Sweet Dish के नाम पर चॉकलेट, केक और आइसक्रीम है और वो उसी के फ्लेवर बदलते रहते है। तथा भारतीय त्योहारों पर मिलावटी कहकर मिठाइयों का दुष्प्रचार भी खूब करते हैं।

भारत में ठंडे के लिये दही, लस्सी, छाछ, नींबू, पुदीना, सौंफ पानी, केवड़ा, जलजीरा, बेल शर्वत, आम, लीची, मौसमी, गाजर, चुकंदर, केवड़ा, खरबूजा, तरबूजा, सत्तू, और भी बहुत कुछ है पर उनके पास ठंडे के नाम पर सिर्फ सेहत बर्वाद करने वाली जहरीला टॉयलट क्लीनर सॉफ्ट ड्रिंक और बियर है।

   सैकड़ो किस्म के आम, गन्ने, चावल, फलों वाले भारत देश में आज लोगों को टॉयलट क्लीनर व बीयर पिलाकर एडवांस बनाया जा रहा है।

इसके बावजूत भारत के पढ़े लिखे मूर्ख अपने 56 भोग को छोड़कर सड़े गले मैदे की बनी चीजें और खाने के बाद कुछ मीठा के नाम पर चॉकलेट और ठंडा मतलब कोका कोला पीने से अपने आप को आधुनिक विकसित समझते है।।

   ना जाने क्यों यह पढ़े लिखे मूर्ख लोग स्वर्ग को छोड़ नरक के पीछे जा रहे है।

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