"गुरुकुल" जिनके आगे "सत्ताएं" झुकती थी।
"सम्राटों" से लेकर "नागरिकों" तक पूरे समाज और शासन के लिए
न्याय , नीति और धर्म की परिभाषा
"गुरुकुल" ही निर्धारित किया करते थे।
जहाँ नागरिकों से लेकर के सम्राटों के पुत्र युवराज आदि बिना जातिगत भेदभाव के एक साथ पढ़ा करते थे, एक साथ खाते थे एक साथ यज्ञ करते थे।
जिनके आदेश समस्त सत्ताओं के लिए अंतिम आदेश होते थे उन गुरुकुलों के प्रति लोगों की,समाज की धारणाएं कितनी बदल चुकी हैं :---
आज समाज में सामान्य अवधारणा है कि-
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "भिखारी" बनाना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "रुढ़िवादी" बनाना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "पंडा ,पुरोहित ,पुजारी" बनाना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "कर्मकांडी" बनाना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "कुए का मेढक" बनाना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "पराश्रित" बनाना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "नौकरी के अयोग्य" बनाना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "business के अयोग्य" बनाना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "technology" से दूर करना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "modern language" से दूर करना
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "गणित,विज्ञान" से अशिक्षित रखना ।
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "अपने उपर भार" बनाना ।
और सबसे खतरनाक
गुरुकुल में पढ़ाना अर्थात अपने बच्चे को "मजाक का पात्र" बनाना ।
यह अवधारणा है उन गुरुकुलों के प्रति हैं जिन्होंने ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म ,तकनीक,
गणित, समाज शास्त्र,
शिक्षा शास्त्र , योग शास्त्र आयुर्वेद आदि आदि का विकास कर मानवता का कल्याण किया और
गुरुकुलों का गौरव संपूर्ण भूमंडल पर स्थापित किया।
ये अवधारणायें एवं गुरुकुलों के प्रति हैं, जिन गुरुकुलों में एक समय विश्व का हर बुद्धिजीवी भारत के गुरुकुलों का भाग बनना चाहता था
और गुरुकुलों में अध्ययन की अभिलाषा लेकर वह हजारों हजारों किलोमीटर दूर से भारत की धरती पर विचरण करता हुआ आता था
परंतु यह उस काल की बात है जब गुरुकुल शिक्षा पद्धति अपनी पूर्ण वैभव और उत्कर्ष पर थी जिसकी बदौलत ही भारत सोने की चिड़िया , ज्ञान-विज्ञानअध्यात्म की खान और वैभवशाली हुआ करता था ।
ये धारणाएं हैं जो समाज में गुरुकुलों के प्रति बनी हुयी हैं,कुछ धरानाएं पूर्णतः अवश्य निराधार हैं परन्तु कुछ
धारणाएं निराधार नहीं हैं,इनके पीछे भी कुछ मूलभूत कारण हैं जिसके लिए गुरुकुल का ,आचार्य वर्ग ,महंत वर्ग ,मठाधीश ,समाज और सरकार जिम्मेदार हैं ,गुरुकुलीय परम्परा को जीवित रखना है तो हमें इसका कोई तर्कपूर्ण स्थाई समाधान खोजना ही होगा
हम आज कल्पना नहीं कर पाते कि ये धारणाएं उन्हीं गुरुकुलों के प्रति हैं जिनमे कभी सनातन संस्कृति के सूर्य श्रीराम ,श्रीकृष्ण का अध्ययन हुआ ,जिनमें कभी #राजनीतिज्ञ_अर्थशास्त्री "आचार्य चाणक्य" जैसे राष्ट्र निर्माता का निर्माण हुआ ,जिनमें कभी आधुनिक #गणित_विज्ञान के पितामह "आचार्य आर्यभट" जैसी मानतम विभूतियों का निर्माण हुआ ।
खैर ये सब सत्य और प्रमाणिक इतिहास आज अवांछित , अविश्वशनीय और अप्रमाणिक घोषित कर दिया गया है , हमें अपनी सनातन संस्कृति की जड़ों को पोषित कर सकने वाले उपाय करने होंगें अन्यथा हम अपनी जड़ों को काट बैठेंगें और ये मानवीय इतिहास की सबसे विनाशक घटना होगी
भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में केवल सनातन संस्कृति का भेद है
सनातन संस्कृति पाकिस्तान जैस देशों से मिट चुकी है और भारत में मिटने की कगार पर है
मरणासन्न अवस्था में पहुँच गयी है जिसे हमारा ह्रदय बेशक स्वीकार न करे पर यही कटु और तथ्यात्मक सत्य है
वैदिक सनातन संस्कृति का प्राण "गुरुकुल" हैं और गुरुकुलों में पढ़ाई जाने वाली "वैदिक शिक्षा" और "वैदिक जीवन पद्धति" है
वैदिक संस्कृति के प्राण गुरुकुल आज विलुप्ति की कगार पर हैं बिना गुरुकुलों के इस सनातन संस्कृति की रक्षा की कल्पना करना व्यर्थ है ।
ये एसी कल्पना है जैसे कोई कहे कि बिना पानी के मानव का अस्तित्व ।
मुझे चिंता इस बात की है मुख्यधारा की शिक्षा से वैदिक शिक्षा का नामों निशान तक मिटा दिया गया है उसे कैसे पुनः मुख्यधारा में वापस लाया जाए ,जो अगले 50 वर्षों में भी अति दुष्कर प्रतीत होता है ,दूसरा वैदिक विद्वान् अपना दम तोड़ रहे हैं .गिने चुने विद्वान् हैं , गिनती के सस्वर वेदपाठी वो भी केवल दक्षिण भारत में ही शेष बचे हैं,जो जीवन संघर्ष के साथ आज भी इस विद्या को बचाने में लगे हैं
उत्तर भारत वेदपाठियों से कई दशक पहले ही विहीन हो चुका है
आज हिंदु लगभग पूर्णतः वेद विद्या से कट चुका है ,वेद से उसका सम्बन्ध ही न रहा है
आज हिन्दू अपने बच्चों को सब कुछ बनाने के लिए तैयार है वो बच्चों को इंजिनीयर,डाक्टर ,वकील , और मल्टीनेशनल कंपनी में नोकर बनाने को तैयार है पर को वेद का विद्वान् बनाने के लिए तैयार नहीं
आज चर्चा इस विषय पर होनी चहिए कि
कैसे वेद विद्या को बचाया जा सकेगा ????
किस तरह गुरुकुलीय परम्परा को जीवित किया जा सकेगा ???
कैसे पुनः सनातन संस्कृति की वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दर्शन युक्त "शिक्षा" और "समाज" का पुनः सृजन किया जाये ????
ये प्रश्न हमारे अस्तित्व और मानवीय सभ्यता के भविष्य का है
अपने आचार्य वर्ग से कहना चाहूंगा कि सबसे बड़ी भूल हमी से हुयी है,आखिर हमने गणित ,विज्ञान ,राजनीति ,अर्थशास्त्र ,ज्योतिष ,खगोल ,भूगोल आदि आदि विषयों को छोड़कर क्यों केवल आधे अधूरे संस्कृत व्याकरण तक सीमित हो गए हैं ??????
जबकि हमारे हर आचार्य ने गणित ,विज्ञान ,राजनीति ,अर्थशास्त्र ,ज्योतिष ,खगोल ,भूगोल आदि विषयों के महत्त्व को बार बार बताया है , और सबसे महत्वपूर्ण इन सब विषयों की नीव मानव कल्याण के लिए हमारे आचार्यों ,हमारे ऋषियों ने ही रखी थी और हमने उन्ही का त्याग कर दिया ,और अरब तथा पश्चिम के लोगों ने इसका लाभ उठाया।
हमारे आचार्यों के कार्यों,उनकी खोजों को अरब तथा पश्चिम के लोगों ने अपने नाम का लेवल गया दिया और उसी लेवल के साथ पढ़ाया
आज हमारे बच्चे हमारे आचार्यों की खोज को विदेशियों के नाम से पढ़ने को विवश हैं ।
आज आवश्यकता है कि सर्वप्रथम सब विषयों का वैदिकीकरण किया जाए और नए सिरे से पाठ्यक्रम का संकलन कर गुरुकुलों आदि विद्या के केन्द्रों में संस्कृत ,वैदिक वांगमय के साथ गणित ,विज्ञान ,खगोल ,भूगोल आदि आदि विषयों को पढ़ाया जाए
कुछ संस्थाएं संस्कृत व्याकरण और वैदिक वांगमय के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रही हैं पर सम्पूर्ण रूप से सभी विषयों को वैदिक द्रष्टिकोण से अध्ययन कराने वाली संस्थाएं लगभग नहीं ही हैं ।
हम इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं ज्ञान ,विज्ञान ,अध्यात्म, तकनीक ,गणित ,युद्धकला आदि विषयों पर आधारित गुरुकुलों की स्थापना हो जहां हम अपने बच्चों को वेद शास्त्र में प्रवीण बनाने के साथ उन्हें इंजीनियरिंग ,मेडिकल, सिविल सेवा आदि क्षेत्रों के लिए भी तैयार कर सकें इसी
संकल्पना को धरातल पर लाने के लिए ऋषिपथ गुरुकुल के प्रस्तावित है।
जल्द ही सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए ऋषिपथ गुरुकुल अपने अस्तित्व में आएगा जहां आप अपने बच्चों को पूर्णकालिक या अल्पकालिक समय के लिए भेज सकते हैं ।
स्थाई शिक्षा के साथ यहां 8 दिन से लेकर 15 दिन तक के शिविर भी आयोजित किए जाएंगे जिसमें बालक ,युवा भी आकर अपनी वैदिक शिक्षा ,सनातन संस्कृति, सनातन धर्म आदि से परिचित हो सकते हैं ।
सनातन संस्कृति विज्ञानपूर्ण है , इसके हर विचार और
क्रिया का अपना विशेष विज्ञान है I
सनातन संस्कृति के विज्ञानपूर्ण तथ्यों को अपने बच्चों ,युवाओं और जन जन के सम्मुख प्रस्तुत करना,उन्हें सनातन संस्कृति से जोड़ना,धर्मनिष्ठ ,संगठित तथा "गुरुकुलीय शिक्षा" को पुनर्स्थापित करना हमारा लक्ष्य है I
संगठित हिंदु ही भारत और हिन्दुओं की हर समस्या का समाधान है I
हिन्दुओं को संगठित तभी बनाया जा सकता है जब हम हिन्दुओं को धर्मनिष्ठ बना सकें उन्हें धर्म का जागरण कर सकें I
हिन्दुओं को धर्मनिष्ठ बनाना ही हमारे हर कार्य का मूल है I
हमारे युवा तभी संस्कृति से प्रेम करेंगें , तभी धर्मनिष्ठ बनेंगें जब वे संस्कृति और धर्म के विज्ञान को जानेगें , जब वे सही सही अपनी संस्कृति और धर्म को जानेंगें I
हमारे युवा जब जब धर्म और संस्कृति से परिचित होंगें तब वे निश्चित ही गर्व करेंगें I
ईश्वर कौन है ???
ईश्वर को कैसे जान सकते हैं ???
धर्म क्या है ??
सनातन संस्कृति में कौन सा विज्ञान है ???
किस ऋषि ने अपने किस ग्रन्थ में विज्ञान और गणित के मूलभूत सिद्धांत दिए है ???
गुरुकुलीय शिक्षा शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण है ????
गुरुकुलीय शिक्षा को कैसे पुनः स्थापित कर सकते हैं ????
गुरुकुलीय शिक्षा से किस तरह बच्चों का सर्वांगीं विकास हो सकता है ???
गुरुकुलीय शिक्षा से समाज ,परिवार और राष्ट्र में कौन से परिवर्तन होंगें ???
आदि आदि प्रश्नों का समाधान इस पेज पर अपने लेखों के माध्यम से देने का प्रयास करूंगा I
हमारी कार्ययोजना
१.:- गुरुकुल :- बालकों का सर्वांगीण विकास करने में सक्षम सर्व्श्रेश्था शिक्षा पद्धति "गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति" को जीवंत करना हमारा लक्ष्य है जहाँ
गणित (mathematics ) ,अंकगणित (arithmetic ) , बीजगणित (algebra ), रेखागणित ( ज्यामिति ,geometry),विज्ञान ( science ), खगोलशास्त्र ( astronomy )
ब्रह्माण्ड ( universe ), भूगोल (geography ), आयुर्वेद और मेडिकल साइंस ( medical science ) ,राजनीति (politics ),समाजशास्त्र ( sociology ),न्यायशास्त्र (Jurisprudence ) , अर्थशास्त्र (economics ) ,भाषा (language ),तकनीक (technology ) ,अध्यात्म (spirituality) ,संगीत ( music ) युद्धकला से परिपूर्ण शिक्षा की व्यवस्था होगी ,जिससे गुरुकुल के विद्यार्थियों को शिक्षण,मेडिकल-इंजीनियरिंग, प्रशासन, राजनीति और समाज सेवा आदि क्षेत्रों के लिए तैयार कर सकें ।
गुरुकुल में पूरे भारत के बच्चे अध्ययन के लिए आ सकेगें। गुरुकुल में अमीर-गरीब सभी को एकसमान व्यवस्था दी जाएगी।
हर जाति वर्ग के लिए गुरुकुल के द्वार सदैव खुले हैं ,गुरुकुल में जातिगत भेदभाव नहीं होगा योग्य हर विद्यार्थी को हर प्रकार की शिक्षा में दीक्षित कर उसे श्रेष्ठ नागरिक बनाने का प्रयास होगा ।
२.:- विद्यालय :- स्थानीय बच्चों को " गुरुकुलीय शिक्षा" में दीक्षित करने के लिए गुरुकुल प्रान्गड़ में विद्यालय स्थापित किया जाएगा , जहाँ आसपास के 8-10 किलोमीटर दूरी तक के बच्चे आ सकें !
३.:- लघु गुरुकुल :- 8 दिन से लेकर 30 दिनों तक चलने वाले लघु गुरुकुल ( शिविर ) जिसमें बच्चे ,युवा और हर उम्र के लोग आ सकते हैं , अभिवावक अपने बच्चों के साथ आ सकते है जहाँ उन्हें गुरुकुलीय जीवन शैली और सनातन ज्ञान से परिचित कराया जाएगा , एक short term course की तरह , जिसे प्रति तीन माह में लगाने की योजना है जब कोई आना चाहे आ सकता है और सैद्धांतिक ( Theoretically ) और प्रायोगिक ( Practically ) रूप से सनातन संस्कृति को जान सकता है , इससे जिनके बच्चे कोंवेंट आदि में पढ़ते हैं वे भी सनातन और गुरुकुलीय ज्ञान से परिचित हो सकते हैं I बच्चों और बढों के लिए अलग अलग कोर्स बनाए गए हैं !
४. Vaidik Classes ( वैदिक कक्षाएं ) मुख्यतः शहरों में कुछ सेंटर बनाकर सप्ताह में हर बालक को कम से कम दो कक्षाएं लगाकर उन्हें practical & theoretical
वैदिक विज्ञान , जीवन दर्शन दर्शन, इतिहास और संस्कृति का ज्ञान कराया जाएँ इस ओर हम प्रयासरत हैं
उत्कृष्ठ शिक्षा से ही मानवता का वर्तमान और भविष्य उत्तम बन सकता है !
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