मोदी जी का रौद्र रूप संसद में उनके भाषण के अंत में दिखा ...जब खड़गे के टोकने पर उन्होंने अपने संयमित वक्तव्य से आगे निकल कर कहा ...हां भ्रष्ट लोगों को डरना पड़ेगा क्योंकि मुझे यहाँ इसलिये ही बिठाया गया ...मोदी जी के शब्द ठीक याद नहीं पर मेरे अंदर कहीं गूंजने लगा ...
मैं शंकर का क्रोधानल कर सकता जगती क्षार क्षार
डमरू की वह प्रलयध्वनि हूं जिसमें नचता भीषण संहार
रणचंडी की अतृप्त प्यास मैं दुर्गा का उन्मत्त हास
मैं यम की प्रलयंकर पुकार जलते मरघट का धुँवाधार
हिंदू तन मन हिंदू जीवन रग रग हिंदू मेरा परिचय
मानें न मानें कल विरोधियों को बिलकुल नींद नहीं आई होगी ...ये अर्जुन के गांडीव की टंकार है ...भक्त मोदी जी को ध्यान से सुनें न सुनें ...पर विरोधी जरूर सुनते हैं ...मोदी जी की बात से विरोधियों में खलबली मचनी तय है ...और यही डर 2019 की जीत है ..यही डर देखने के लिये लोग मोदी जी को हमेशा प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते हैं...
सीधे साधे सरल व्यक्तित्व के साधुपुरुष अटल जी के साथ इन राजनीतिक गिरोह वालों ने जो व्यवहार किया था ...जिस तरह भारत माता के सपूतों के जीवन और प्रतिष्ठा के साथ ये राजनीतिक गिद्ध खेले हैं ..उसकी फ़ांस हर देशभक्त के सीने में है ...वही फांस मोदी जी के दिल में गड़ी हुई है ...इसलिये भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस रहेगा सिर्फ इतना कह कर छुट्टी नहीं की ...बल्कि उसकी पूरी रूपरेखा तैयार की ...कौन सा चूहा किस बिल में घुसेगा किसे कहाँ से कैसे निकालना है ...सब तैयार किया ...तब जाकर ये शब्द कहे ...
बस इतना ही कि आत्मिक उल्लास है उस रूप उस तेज को देखकर उन शब्दों को सुनकर ।
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