देश_आत्मचिंतन_करे

वाट्सअप और फेसबुक पर बहुत ही भावुक मैसेजेस की बाढ़ देख रहा हूं...

कहीं स्कूली बच्चों ने कहा हमारी सुविधाएं ले लो पर जवानों की मौत का बदला ले लो...

कहीं नौकरीपेशा अपनी तनख्वाह आधी करके रक्षा बजट बढाने की अपील कर रहे हैं और किसी ने कहा मोदी जी सारा विकास कार्य रोक दीजिये .. . सारा बजट इस्तेमाल कर लीजिए पर पाकिस्तान का नामो निशान मिटा दीजिये हमेशा हमेशा के लिए....

अभी आप भावुक हो रहे हैं....
देश के लिए आज आपकी भावनाएं निहित स्वार्थ से ऊपर हैं....

बलिदानियों की वीरगति ने आपको शोकाकुल कर दिया है.....

ऐसे समय मे तो आपकी मानसिक स्थिति ऐसी सजग और स्थिर भी नहीं है कि आप से पूछ सकूँ यही देशभक्ति , यही राष्ट्रप्रथम की भावना वोट देते समय आपकी जाति से कैसे हार जाती है ?

आरक्षण , सब्सिडी और जातिगत स्वार्थ के लिए पटरियां उखाड़ते और कर्जमाफी के समय तो आप ये नहीं सोचते न कि इससे सरकार पर कितना बोझ पड़ता होगा, जिसके लिए कहीं न कहीं तो कटौती करनी ही पड़ती होगी न...

मैं आपसे जवाब नहीं मांग रहा ....मैं कोई नहीं होता....
पर क्या आप अपने आपको इसका जवाब देंगे ?

आप एक ज़िद पर , एक छोटी मांग पर मजबूत सरकारों को हटाने की धमकियां देकर क्या अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मार लेते ???

#देश_आत्मचिंतन_करे

जो नेपाल में माओवादियों ने किया, जो यूक्रेन में रूस ने किया, जो तिब्बत में चीन ने किया, वो हम क्यों नहीं कर सकते.. उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, फारूख अब्दुल्ला, हुर्रियत वाले पाकिस्तान भक्त अलगावपरस्त जितने भी कीड़े-मकोड़े हैं सब के सब भारतीय सुरक्षा में ही तो पल रहे हैं.. सबके घरों के बाहर हिंदुस्तानी सैनिक पहरा देते हैं.. एक आदेश दो और मरवा दो.. थोड़े हो हल्ला होगा फिर सब शांत हो जायेगा

जब तक ऐसे जातिवाद कीड़े भारत में रहेंगे। जातिवाद बढेगा ही कम न होगा इस बंदे से मुझे इतनी नफरत हो रहीं हैं कि कोई सोच भी नहीं सकता इस कुत्ते ने शहीद जवानों में भी जातिवाद ढूंढ लिया। ऐसे जातिवाद कीड़े भारत में रहेंगे तो क्या से क्या करेगें इसकी सोच से ही पता चलता है। पटरियां उखडना तो आम बात होगी जिनकी सोच ऐसी होगी।

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