अहिंसा परमो धर्म: के अधूरे वाक्य ने भारत की जड़ों को ऐसा खोखला किया कि आने वाली नस्लें खड्ग के वज़न और रणभेरियों के स्वर को भुला बैठीं.
राजा का धर्म अहिंसा नहीं हो सकता. राजा का धर्म शक्ति से सन्तुलन बनाना हो सकता हैं.
आज भारत और उसके मूल निवासी हिन्दुओं की दुर्गति का कारण यही अहिंसा परमो धर्म: है. जबकि शांति, अहिंसा से नहीं शक्ति के संचय और संतुलन से आती है.
जीवित सभ्यताएं हिंसक ना हों मगर विद्रोही जरूर होती हैं.
जो कौम अपने अस्तित्व के लिए खड़ी नहीं होती, वो कौम दूसरी कौमों के लिए दास पैदा करती है, शासक नहीं....
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