"जो रोग जहाँ उत्पन्न होता है उसकी औषधि वहीँ मौजूद होती है"

महर्षि चरक ने चरक संहिता में लिखा है "जो रोग जहाँ उत्पन्न होता है उसकी औषधि वहीँ मौजूद होती है"..आतंकवाद का रोग ७२ हूरों वाले अंधविश्वास की वजह से जन्म लेता है और इसका इलाज भी अन्धविश्वास से ही होगा..आतंकियों के शवों को कूड़े के ढेर में जलाना पड़ेगा जिससे उनकी जन्नत वाली फ्लाइट पंक्चर हो..हमें पता है ऐसा कुछ नहीं होता पर उनके लिए तो ७२ हूरे कलश सजाकर बैठी है न ......अपने को विश्वगुरु कहते घूमते हैं हम तो 'गुरूजी'  दो न आतंकवाद का इलाज दुनिया को...नैतिकता वैतिकता के चक्कर में वही गलती मत दोहराना जो पृथ्वीराज चौहान ने 'धर्मयुद्ध' के चक्कर में १६ बार हराकर छोड़ दिया था गौरी को..भाड़ में गया धर्मयुद्ध और नैतिकता का पाठ..
#Burn_Terrorists_with_Rubbish

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