अकेले मोदी कहाँ-कहाँ और कितना ध्यान रखेंगे??

कल से कई-कई मित्रों (और दुश्मनों) ने बारम्बार अपनी-अपनी वाल पर पूछा कि आखिर ये 200 किलो विस्फोटक आया कहाँ से?? उसका जवाब मिल गया है...

सूत्रों के अनुसार यह विस्फोटक एक दिन में नहीं आया (स्वाभाविक है), बल्कि पुलवामा के कुछ मदरसों के बच्चों के बैग में थोड़ा-थोड़ा करके भेजा गया, और अंत में एक स्थान पर उस विस्फोटक की Assembling की गई. (पाठकों को याद होगा कि कुछ दिन पहले कश्मीर के एक मदरसे में विस्फोट भी हुआ था, जिसमें आठ लोग मारे गए थे... मदरसे आने वाले बेचारे मासूम बच्चों को पता भी नहीं होगा कि उनके अब्बू या मामू उनके स्कूल बैग में क्या रख रहे हैं...). ज़ाहिर है कि सुरक्षा बल, छोटे बच्चों की चेकिंग इतनी गहराई से नहीं करते हैं... इसलिए थोड़ा-थोड़ा करके विस्फोटक एकत्रित हो गया...

यह पहली गुत्थी तो सुलझ गई, अभी दूसरी गुत्थी सुलझना बाकी है कि विस्फोटकों से लदी SUV इतनी सघन चेकिंग के बावजूद सैनिक बलों के काफिले वाले रास्ते में कैसे आ गई?? ज़ाहिर है कि इसमें भी किसी "मीर जाफर" का हाथ है, जिसने या तो तगड़ा पैसा खाकर, अथवा "दीन-मज़हब" के नाम पर उस गाड़ी को कहीं से निकलने में मदद की... उस व्यक्ति (या समूह) का पता लगाना महत्त्वपूर्ण है...

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अब एक कड़वी (ज़ाहिर है कि सच्ची) बात :- भारतीयों की ईमानदारी की बात करना बेकार है... इन्हीं सूत्रों के अनुसार भारत-बांग्लादेश की लंबी सीमा पर प्रतिदिन सैकड़ों गौवंश बड़े आराम से पार होता है, वो भी "हिंदुओं" को ही पैसा खिलाकर...

जब भारत के रग-रग में ही "भ्रष्टाचार और सेटिंग" समाई हुई हो... अकेले मोदी कहाँ-कहाँ और कितना ध्यान रखेंगे??

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