राजनीति और देश हित मे फर्क समझना चाहिये चाहे वे नेता हो या उनके चमचे या अन्धभक्त।

हर देश के नागरिकों का एक करैक्टर होता है।जैसे जापानियों को सबसे ज्यादा देशभक्त,पाकिस्तान तो आतंकी है ही,चाइना वालो को कट्टर राष्ट्रवादी माना जाता है।लेकिन भारतीयों को सेल्फिश और पैसे के पीछे भागने वालो में गिना जाता है।जंहा पैसा मिलेगा हम वही जाकर बस जाएंगे।पैसों के लिये देश को गाली भी देंगे तो बेच भी देंगे।अपने फायदे के आगे देश छोटा लगता है हमें।
देशभक्ति वैगरह के टॉपिक सैनिकों या खाली आदमियों के है।
आज तो ऐसा समय आ गया है कि कोई देशभक्ति की  बात करता है तो वो बीजेपी का या it सेल वाला हो जाता है।
लोग इतने गिर चुके है कि उरी जैसी मूवी को भी pm का प्रचार बता रहे है,सेना का सम्मान नही।
लादेन जैसे एक आतंकी को मारने पर अमेरिका के अंदर उस ऑपरेशन पर तीन चार मूवी बनी।लादेन को किसी को दिखाया नही सीधे समुद्र में दफनाया गया।लेकिन न किसी ने सबूत मांगे न सवाल उठाए।लेकिन हम लोग राजनीतिक विरोध में इतने अंधे हो जाते है कि क्या बोलना है सोच ही नही पाते।इसलिये सर्जिकल स्ट्राइक पर केजरीवाल से लेकर तमाम विपक्ष ने सवाल उठाए सबूत मांगे।
राजनीति और देश हित मे फर्क समझना चाहिये चाहे वे नेता हो या उनके चमचे या अन्धभक्त।

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