"कबीरा तेरी दुनिया मे भांति भांति के लोग",,,,,,

एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ, (केवल मजाक के लिए)
एक बार up बिहार के लोगो की दारू पीकर के मीटिंग हुई और चर्चा इस बात पे हो रही थी कि अपने अपने राज्य को मुंबई गुजरात पंजाब की तरह कैसे विकसित किया जाए। कुछ लोगो ने सुझाव दिया कि क्यों न हम भी हर सीट से केवल पढ़े लिखे नेताओं को वोट दे। कुछ ने कहा कि हम में से कोई भी up बिहार का आदमी अब रोजगार के लिए बाहर के राज्यों में नही जाएगा, अब हम यही अपना स्वरोजगार योजना चलाएंगे और राज्य के राजस्व में भागीदारी सुनिश्चित करेंगे कुछ ने कहा कि अब हम सभी लोगो से ईमानदारी से सरकार को टैक्स देंगे जब टैक्स ज्यादा होगा तो सरकार विकास के कार्य ज्यादा होगा।

उन सब मे एक बिहारी भाई ने एक जबरदस्त सुझाव दिया कि क्यों न हम सब मिलकर अमेरिका पे हमला बोल दे वो हमें हरा देंगे फिर हमारे राज्य का अपने आप विकास वो कर देंगे। सब लोगो ने इस सुझाव को सबसे सही बताया और सबकी सहमति इस बात पर बन गयी और सब लोग अब हमले की तारीख़ तय करने लग गए। अब जिस बिहारी भाई ने ये सुझाव दिया था वो फिर से चुप चाप कोने में बैठा सोच रहा था, तभी सबकी नजर उसपे पड़ी और सबने एक सुर में पूछा ,"अरे फलाने अब का सोच रहे हो?"
तो फलाने ने जवाब दिया कि "अगर हम अमेरिका से युद्ध मे जीत गए तो?"
इसे कहते Extreme optimist Man

अब हमारे यशवंत सिन्हा जी को ही ले लो, अगले के पास न पार्टी है न कार्यकर्ता हैं न ही कोई आइडियोलॉजी है और न ही कोई पार्टी इनको टिकट देने वाला है पर अगला इतना ऑप्टमिस्ट है कि कहता है कि मुझे प्रधानमंत्री बनाओ तो हर साल 2-3 करोड़ रोजगार देगा।
मतलब कबीर का वो मॉडर्न दोहा याद आ जाता है।

"कबीरा तेरी दुनिया मे भांति भांति के लोग",,,,,,

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