एक खबर पढ़कर दिल दहल गया ... सीबीआई चीफ आलोक वर्मा एनएसए चीफ अजीत डोभाल का फोन टेप करा रहे थे... वह भी उस समय जब अजीत डोभाल को बेहद गुप्त सीक्रेट मिशन सर्जिकल स्ट्राइक कि जिम्मेदारी दी गई थी ... अजीत डोभाल को पाकिस्तान के विरुद्ध पाकिस्तान की सीमा के अंदर पनप रहे आतंकी कैंपों को नष्ट करने के लिए एक सिक्रेट मिशन पर लगाया गया था ... और उस सीक्रेट मिशन का भंडाफोड़ या यूं कहें गद्दारी करने के लिए आलोक वर्मा अजीत डोभाल की फोन टेप करा रहे थे मतलब उनके द्वारा किए जा रहे बातों को रिकार्ड कराने की कोशिश कर रहे थे ... रिकॉर्ड करके क्या करना चाहते थे यह जानना देश के लिए बेहद जरूरी है और यह बेहद संवेदनशील मामला है।
मैं अक्सर कहता हूं कॉन्ग्रेस एक माफिया सिंडिकेट की तरीके काम करती है, उसके आदमी हर जगह है सरकार के अंदर सरकार के बाहर यहां तक सरकार की सूचना तंत्र में भी ... इसे जीतना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक बहुत लंबे कालखंड तक इस पार्टी ने देश पर राज किया है बीच में जो इक्का-दुक्का लोगों की सरकार बनी भी वह भी इनके सिंडिकेट के द्वारा ठिकाने लगा कर देश में वही काम किया गया जो वास्तव में कांग्रेस चाहती थी, भले ही कांग्रेस सत्ता में ना रही हो। किसी के लिए भी उस नेक्सस तोड़ना आसान काम नहीं था, टूटा तो खैर अब भी नहीं है लेकिन मोदी सरकार ने चोट बहुत नाजुक जगह पर की है। जिससे यह पूरा का पूरा नेक्सेस कराह रहा है। हालांकि यह प्रकरण मुझे मोदी सरकार पर भी आरोप लगाने से मुक्त नहीं कर पा रहा है ऐसे देशद्रोही गतिविधि के बाद आलोक शर्मा पर सिर्फ निष्कासन के कार्यवाही यह कतई उचित नहीं ऐसे व्यक्ति के लिए बाकायदा अभियोग लगाकर देशद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए उसका साथ देने वाले उसके संपर्क में रहने वाले उसका किसी भी स्तर पर सहयोग करने वाले को संवैधानिक रूप से दंड देना यह सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए था, लेकिन कहते हैं ना किसी लकीर को छोटा करने के उससे बड़ी लकीर खींचना बेहतर नीति होती है ...
मगर आलोक वर्मा और कन्हैया कुमार जैसे अपराधियों की मदद कर कांग्रेस ने अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है ... बहुत अचंभित और शसंकित भी की यदि इन देशद्रोहियों की सरकार दुबारा बन गई तब इस लोकतंत्र का क्या होगा? राजनीति से अपेक्षाकृत उदासीन भारतीय मतदाता कहीं फिर ना छला जाय ...???
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