मोदी के लिए आप सांस्कृतिक और सभ्यतागत मानक रखना चाहते हो?

अगर मैं आज से 50 साल बाद का एक इतिहासकार हूँ तो मोदी के शासनकाल की चाहे जो समीक्षा करूँ... अगर एक नागरिक और एक वोटर की तरह इन कार्यकाल का आकलन करूँ तो यही कहूँगा कि आज तक के स्थापित मानदंडों पर यह बहुत ही सफल शासन रहा है. सड़कें बनी हैं, बिजली आयी है, महंगाई स्थिर रही है, बल्कि कई मामलों में घटी है...और सबसे बड़ी बात कि पाँच सालों में छोटा बड़ा कैसा भी एक घोटाला नहीं हुआ है. कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ है और हमने हज़ारों में आतंकवादी ठोक डाले हैं.
 
     आज तक इन्हीं मापदंडों पर सरकार चुनते आ रहे थे ना...या कहें, कभी ये मापदंड लागू करने का अवसर भी नहीं मिला था. इन्हीं मापदंडों पर सरकारों और नेताओं को कोसते आ रहे थे. और आज एकाएक मोदी के लिए आपने नए मानक तय कर लिए? गोलपोस्ट खिसका दी?
     
      मोदी के लिए आप सांस्कृतिक और सभ्यतागत मानक रखना चाहते हो? समाज के कोई सांस्कृतिक मानक हैं क्या? और नहीं हैं तो पाँच साल में ये मानक खड़े हो जाएँगे?
  
      एक पूरी पीढ़ी लगेगी, जब हम अपने नेतृत्व से यह पूछने की स्थिति में खड़े होंगे कि आप सभ्यता और संस्कृति के मापदंडों पर कहाँ खरे उतरते हैं. तबतक हमारे समाज से यही सड़क, बिजली, पानी वाली सरकार मिलती रहे तो भी गनीमत है. और अगर ठगबंधन खड़ा हो गया तो पाषाणयुग की तैयारी कर लीजिए....
एक और बार भाजपा सरकार...
#BJP2019

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