❤️ #BJP2019
मार्च 2017 का वाकया है। रेलमंत्री थे श्री सुरेश प्रभु। बहुचर्चित था उनका और रेलवे का ट्विटर हैंडल... कि एक ट्वीट पर अमुक के बच्चे को दूध मिल गया/ हगीज़ मिल गई/ दवाई मिल गई...
इसी मार्च के तीसरे सप्ताह की एक रात, लगभग दो बजे मेरा फोन घनघनाया... कॉल रिसीव की तो आवाज़ आई, "बाबा, ट्रेन (स्लीपर क्लास) का टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद बहुत दिक्कत में हूँ। लगता है यूरिनरी इन्फेक्शन हुआ है... बैठा तक नहीं जा रहा..."
जवाब में कुछ तात्कालिक राहत के उपाय सुझाए, और कुछ देर धैर्य रखने को कहा।
इसके बाद तत्कालीन रेल मंत्री के ट्विटर हैंडल पर एक ट्वीट किया, जिसमें ट्रेन नंबर, कोच नंबर, और बर्थ नंबर का उल्लेख करते हुए सम्बंधित यात्री की परेशानी बताई।
अब तक इसे राजनीतिक शोशेबाज़ी मान रहा मैं, उस समय आश्चर्यचकित रह गया जब within minutes मंत्रालय से जवाब आया कि आप अपना मोबाइल नंबर दीजिए ताकि उठाए जा रहे कदमों के बारे में अपडेट रखा जा सके।
कुछ ही देर में मुझे टैग करते हुए रेल मंत्रालय से ट्वीट आया, जिसमें ट्रेन के निकटस्थ स्टेशन के ज़ोन और स्टेशन मास्टर को भी टैग करते हुए समुचित कार्रवाई के निर्देश थे।
इसके बाद तो सम्बंधित स्टेशन मास्टर के ट्वीट पर ट्वीट मिलते रहे।
असली कहानी तो उस मित्र से फोन पर मालूम पड़ी।
मेरे ट्वीट के वक़्त ट्रेन भुसावल पहुँचने वाली थी... ट्रेन स्टेशन पर पहुंचे उसके पहले इतनी रात को दवाई और डॉक्टर का इंतज़ाम करने के लिए ट्रेन को कुछ देर आउटर पर रोका गया... 15 - 20 मिनट के हाल्ट के बाद ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आई, और साथ ही आया डॉक्टर...
मैन्युअल बनते रेल टिकट के ज़माने से रेल यात्राएं करने वाले मुझ जैसे मनुष्य के लिए ये सब किसी परी कथा के सच होने जैसा था... घर बैठे-बैठे मैंने रेल मंत्रालय से मदद मांग ली... मदद किए जाने का आश्वासन मिला... और मदद मिल भी गई!
सचमुच भारत बदल गया है...
मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए अनगिनत सुखद अनुभवों में से ये एक था, आगे भी बताता रहूँगा :)
#BharatTrustModi
Comments
Post a Comment